जिहादियोंने डेढ सौ वर्ष पुरातन शिव मन्दिरको चारों ओरसे घेरकर शिवलिङ्ग किया ध्वस्त


०७ दिसम्बर, २०२०

उत्तर प्रदेशके सहारनपुरमें एक शिव मन्दिरको जिहादियोंने चारों ओरसे घेरा हुआ है । हिन्दुओंका कहना है कि डेढ सौ वर्षों पुरातन इस मन्दिरको पूर्व कालमें दूरसे देखा जा सकता था; किन्तु अब दिखाई नहीं देता है; इसे मात्र देखनेके लिए भवनोंकी छतोंपर चढना पडता है । अब मन्दिर बन्द पडा है तथा शिवलिङ्गको तोड डाला गया है । इसके लिए हिन्दू स्थानीय मुसलमानोंके बलपूर्वक अतिक्रमणको उत्तरदायी बताते हैं । बजरंग दलका कहना है कि इस षड्यन्त्रका आरम्भ साढे ३ दशक पूर्व ही हो गया था और मन्दिर अभी बन्द है । गोटेशाह-चुंगीमें यह मन्दिर, हिन्दुओंकी आस्थाका केन्द्र रहा है; किन्तु इसके चारों ओर अब ‘कारखाने’ बनाकर ऊंची भीत (दीवारें) खडी कर दी गई हैं ।
‘वीएचपी’के सचिव सचिन मित्तलने जनपद-अधिकारी अखिलेश सिंहको इसका विज्ञापन सौंपते हुए, मन्दिरको खुलवानेकी विनती की है और कहा है कि कोई उपाय नहीं होनेपर श्रद्धालुओंको स्वयं ‘कारसेवा’के लिए विवश होना पडेगा ।
मुसलमानोंने भूमिपर अतिक्रमणकर मन्दिरके मार्ग अवरुद्ध कर दिए हैं । आजसे २७ वर्ष पूर्व यह मन्दिर लाला धूलि चन्दकी सम्पत्ति थी; किन्तु उनके वंशजोंने इसकी सुध नहीं ली और ‘लन्दन’में जा बसे । अन्योंने इस भूमिको क्रय कर लिया । सम्बन्धित उच्च अधिकारियोंने अब जांच आरम्भ कर दी है । विश्व हिन्दू परिषदद्वारा भी विज्ञापन दिया गया है कि ४८ घण्टोंमें मन्दिरको खोलनेकी व्यवस्था नहीं होनेपर, लोग मार्गोंपर उत्तर आएंगे, जिसके लिए प्रशासन उत्तरदायी होगा ।
शिवलिङ्गके साथ-साथ द्वारोंको भी नष्ट कर दिया गया है । जिहादियोंको ‘बाबर’का वंशज बताया जा रहा है । यह मन्दिर एक बीघा भूमिपर बनाया गया था । आस-पास मुसलमानोंके बसनेसे लोग आहत होकर पलायन करने लगे । पुजारियोंको पर्याप्त आजीविका नहीं मिलनेपर मन्दिर सूने होने लगे, तो इसीका लाभ उठाकर मन्दिरोंपर जिहादियोंने अधिकार करना आरम्भ कर दिया । इस प्रकार ऐसे दस मन्दिरोंकी सङ्ख्या बताई जा रही है ।

        आश्चर्य है कि यह हिन्दुस्तान है या पाकिस्तान ?, जो मन्दिर इस दशामें है ! जिहादियोंको जहां भी अवसर प्राप्त होता है, भू-अतिक्रमण आरम्भ कर देते हैं । शासकगण ‘वोट बैंक’की नीतिके कारण नेत्र मूंद लेते हैं । इसमें उत्तरदायी अधिकारी ही दोषी हैं, जो कठोर दण्डके पात्र हैं, योगी शासन त्वरित उन्हें दण्डित करें व अतिक्रमण हटाकर मन्दिरका पुनर्निर्माण करे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ

स्रोत : ऑप इंडिया

 



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