०८ दिसम्बर, २०२०
उत्तर प्रदेशके जनपद बलरामपुरके गांव शेखापुर पचीठेमें एक हिन्दू महिला रत्ना देवी उपनाम गुडियाने आरोप लगाया है कि स्थानीय उपद्रवियों जाहिद अली, चांद अली, सत्तार अली, पीर अली और सुबरातीद्वारा उसकी भूमिका अधिग्रहण करनेके उद्देश्यसे उसके साथ मार-पीटकी गई है । उसने पुलिस प्रशासनपर भी उचित कार्यवाही न करने तथा ग्राम प्रधानपर इन ‘भू-माफियाओं’से मिले होनेका आरोप लगाया ।
एक दृश्यपट प्रसारित हुआ है, जिसमें रत्ना देवीने स्वयंको पासवान जातिका बताते हुए अपनेपर हुए अत्याचारोंका विस्तृत वर्णन किया है । रत्ना देवीने बताया कि पानी पटानेको लेकर आरोपियोंने उसके पति तथा बच्चोंको पैरोंसे मारा तथा उसके बाल पकडकर उसे उठाकर पटक भी दिया । दृश्यपटमें रत्ना देवीके पति आरोपियोंके भवनकी और इंगित करके बताते हैं कि ये लोग उनकी भूमि अधिग्रहित करनेके इच्छुक हैं । ग्राम प्रधान भी आरोपियोंके साथ मिलकर कह रहा है कि ये परिवार गांव त्यागकर चला जाए ।
दृश्यपट प्रसारित होनेके पश्चात उत्तर प्रदेशके मुख्यमन्त्रीके सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठीने घटनाका संज्ञान लेते हुए उत्तरप्रदेश पुलिसको कठोर कार्यवाही करनेके निर्देश दिए । बलरामपुरके ‘एसपी’ तथा ‘डीएम’ने पीडिताके रहवासपर जाकर उससे बात की और सम्बन्धित अधिकारीको ध्यान देने हेतु निर्देश दिया ।
प्रशासनकी कार्यवाहीसे सन्तुष्ट होकर रत्ना देवीने कहा कि उनके भवनके आगे जो रिक्त स्थान है, वहां जो अतिक्रमण किया गया है, उसे वे हटा लेंगी; परन्तु सभीके भवनोंके आगे किए गए ऐसे अतिक्रमण हटना चाहिए ।
इससे पूर्व पुलिस प्रशासनने इस घटनाको दो पक्षोंके मध्य हुआ भूमि विवाद बताया था, तथा कहा था कि यह विवाद न्यायालयमें विचाराधीन है । पुलिसने यह भी कहा था कि महिलाने दृश्यपट पुलिसपर दबाव बनानेके उद्देश्यसे बनाया है ।
उत्तर प्रदेशके मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथके द्वारा आतङ्कियोंपर उचित कार्यवाही की जाती है । उनके संज्ञानमें आनेके उपरान्त ही पुलिसने महिलाकी योग्य सहायता की है; परन्तु जबतक पुलिस स्वयंसे सहायता नहीं करेगी, हिन्दू कैसे शासनपर विश्वास करेंगे ? – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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