१० दिसम्बर, २०२०
राष्ट्रीय जांच एजेंसी’एनआईए’ द्वारा दायर चार्जशीटमें एक चौंकाने वाली बात सामने आई है कि अमेरिका आधारित ‘सिख फॉर जस्टिस’ (‘एसएफजे’)जो कि एक खालिस्तान समर्थक संगठन है, भारतीय सेनामें सम्मिलित सिख समुदायके भीतर भारत-विरोधी भावनाओंको भरने का प्रयास करता रहा है । इस प्रगटीकरणमें पता चला है कि ‘एसएफजे’ इन सिख सैनिकोंको देशके विरुद्ध विद्रोह करने के लिए भी भडकाकर देशकी सुरक्षाको संकटमें डालने का प्रयास करता रहा है ।
‘एनआईए’के अनुसार, “एसएफजे’ भारतीय सेनामें सम्मिलित सिख सैनिकोंको भडकानेके साथ-साथ कश्मीरके युवाओंको कट्टरपंथी बनाने और भारतके लिए कश्मीरसे अलग होनेके समर्थन देने पर प्रयास कर रहा है ।”
‘एसएफजे’ नेता और आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू, खालिस्तान टाइगर फोर्सके प्रमुख हरदीप सिंह निज्जर और बब्बर खालसा इंटरनेशनल के प्रमुख परमजीत सिंह उर्फ पम्मा सहित १६ आरोपितोंके नाम वाली चार्जशीटमें यह भी दावा किया गया है कि ‘एसएफजे’ कश्मीरी युवाओंको कट्टरपंथी बनानेका उपाय कर रहा है और प्रत्यक्ष रूपसे कश्मीरके अलग होने को समर्थन दे रहा है ।
‘मीडिया रिपोर्ट्स’के अनुसार, ‘एनआईए’के प्रवक्ताने बताया कि; जांच ‘एजेंसी’ और अन्य केंद्रीय ‘एजेंसियों’द्वारा सौंपे गए डोजियरके आधार पर, ‘एसएफजे’के मुख्य संरक्षक-गुरपतवंत सिंह पन्नु, हरदीप, सिंह निज्जर और परमजीत सिंह उर्फ पम्माको गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए)के अन्तर्गत ‘आतंकवादी’के रूपमें नामित किया गया है ।
प्रवक्ताके अनुसार, फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप, यू-ट्यूब और कई अन्य अन्तरजालोंपर अनेकों ‘सोशल मीडिया अकाउंट लान्च’ किए गए थे जिनका उपयोग युवाओंको कट्टरपंथी बनाने, शांतिऔर सद्भावको नष्ट और आतंकवादी गतिविधियोंके लिए धन एकत्रित करनेके लिए किया जा रहा था । केन्द्रीय जांच ‘एजेंसी’ने बुधवार दिसम्बर ८, २०२०को ‘यूएपीए’के अन्तर्गत संयुक्त राज्य अमेरिका, ‘यूनाइटेड किंगडम’ और कनाडाके १६ लोगोंके विरुद्ध चार्जशीट दायर की, जो कथित रूपसे भारतमें धर्म और क्षेत्र के बहाने देशद्रोही गतिविधियों और शत्रुतापूर्ण दुश्मनीमें जुटे थे ।
‘एनआईए’के एक अधिकारीके अनुसार, विषयकी जांचसे पता चला है कि मानवाधिकारोंकी वकालत करने वाले समूहके नाम पर आरम्भ किया गया ‘एसएफजे’ पाकिस्तान सहित विदेशी धरतीसे संचालित होने वाले ‘खालिस्तानी आतंकवादी समूहों’का ‘फ्रंटल आर्गेनाइजेशन है । अधिकारीने कहा; “यह अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया जैसे विभिन्न देशोंमें ‘मानवाधिकार सुरक्षा समूह’की आडमें अपने कार्यालय चलानेवाला एक अलगाववादी संगठन था ।”
‘एसएफजे’ संगठनको लेकर ‘एनआईए’का उद्द्घोषण न्यूयार्क ‘टाइम्स’का एक समाचार इस बातकी पुष्टि करता है । जून १२, १९८४ के दिवस अमेरिकी समाचारपत्र न्यूयार्क ‘टाइम्स’में प्रकाशित एक समाचारके अनुसार, भारतीय सेनाने ऐसे ५७४ सिखोंको बन्दी किया था, जो खालिस्तानी चरमपन्थी भिंडरवालेके कब्जेसे स्वर्ण मंदिरको स्वतन्त्र करानेके लिए चलाए गए ‘आपरेशन’से क्रोधित होकर भारतीय सेनासे भाग निकले थे । सम्भव है कि यह ‘एसएफजे’ संगठनके षड्यंत्रोंका ही कारण था जो भारतको अपने उत्कृष्ट सिख सैनिकोंको खोना पडा ।
भारतीयसेना द्वारा खालिस्तानी चरमपंथियोंसे स्वर्ण मन्दिरको स्वतन्त्र कराने को लेकर चलाए गए ‘आपरेशन ब्लू स्टार’ है जिसे लेकर सिख समुदायके एक वर्गके भीतर सत्ता पक्षके प्रति अत्यन्त आक्रोश भी रहा और इसके चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधीको ३१ अक्टूबर, १९८४ को उन्हींके सिख सुरक्षाकर्मियोंने गोली मारकर हत्या कर दी । भारत शासनद्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस ‘आपरेशन’में ८३ सैनिक तथा ४९३ आम नागरिक व चरमपंथी मारे गए । इस कार्यवाहीमें ८६ से अधिक नागरिक, २४९ सैनिक घायल हो गए जबकि १५९२को बन्दी बनाया गया ।
सिख फॉर जस्टिस’ (‘एसएफजे’)जो कि एक खालिस्तान समर्थक संगठन है, इसको भारत शासन द्वारा पूर्ण रूपसे प्रतिबन्ध लगाना आवश्यक है । ताकि भविष्य में ऐसे राष्ट्रद्रोही सङ्गठन पुनः न बनें जो देश को क्षति पहुंचाए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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