१३ दिसम्बर, २०२०
केरल पुलिसने एर्नाकुलममें यूसुफ नामके युवकको बन्दी बनाया है । उसने अपने वाहनमें एक कुत्तेको बांधकर कई किलोमीटरतक घसीटा था ! घटना शुक्रवार, ११ दिसम्बरकी प्रातः लगभग ११ बजे परवुर क्षेत्रमें हुई । ‘मीडिया रिपोर्ट्स’के अनुसार, यूसुफने बर्बरता भरी घटनाको इसलिए किया; क्योंकि वह कुत्ता उस क्षेत्रके कई कुत्तोंके साथ मिलकर समस्या उत्पन्न कर रहा था । इससे क्रोधित यूसुफने कुत्तेको अपनी वाहनसे बांधकर कई किलोमीटरतक घसीटनेका निर्णय किया । मार्गसे जा रहे अखिल नामके युवकने पूरी घटनाका ‘वीडियो’ बना लिया, जिसमें आरोपीको इस निर्दयता भरी घटनाको करते हुए देखा जा सकता है ।
‘सोशल मीडिया’पर चर्चित हो रहे ‘वीडियो’में यह भी देखा जा सकता है कि आरम्भमें कुत्ता वाहनकी गतिके साथ-साथ भागनेका प्रयास करता है; परन्तु वाहनकी गति बढनेके पश्चात वह थक जाता है, जिसके पश्चात वह वाहनके साथ सडकपर घसीटता जाता है । यह देखकर अखिलने प्रकरणमें हस्तक्षेप किया, इसके उपरान्तभी यूसुफ पूरी अकडमें था । अखिलने उससे पूछा, “तुम्हारी समस्या क्या है ?, यदि यह कुत्ता मर गया तो !” अपना पक्ष कमजोर होनेपर यूसुफने कुत्तेको सडकपर छोड दिया ।
इस घटनाके प्रत्यक्षदर्शियोंके अनुसार, “यह एक भयावह दृश्य था । कुत्तेकी गर्दनमें एक मोटी रस्सी बंधी हुई थी और उसे निर्दयताके साथ मार्गपर कई किलोमीटरतक खींचा गया ।” फिर इस घटनाकी जानकारी पशु अधिकार सङ्गठनको दी गई, सङ्गठनने यूसुफके विरूद्ध परिवाद प्रविष्ट कराई, जिसके पश्चात उसे बन्दी बनाया गया ।
पुलिसने आरोपीको भारतीय दण्ड संहिताकी धारा ४२८ (जीव जन्तुवोंकी हत्या/विकलांग बनाना), ४२९ (मवेशियोंकी हत्या/विकलांग बनाना) और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम १९६० की धारा ११ (१) के अन्तर्गत बन्दी बनाया गया है । वर्तमानमें कुत्तेको उपचार के लिए भेज दिया गया है ।
केरलमें हुई थी गर्भवती हथिनीकी हत्या जून २०२० के मध्य केरलके पलक्कडमें एक गर्भवती हथिनीको विस्फोटक पदार्थ खिला दिया गया था, जिसके ऊपर गुडकी परत थी । इस कारणसे उसकी मृत्यु हो गई थी और इस घटनाको लेकर पूरे देशमें काफी आक्रोश था । हथिनीका एक चित्र भी सामने आया था, जिसमें वह पानीके भीतर शान्तिसे खडी थी और वह विस्फोटक पदार्थके कारण प्रत्येक क्षण तडप-तडपकर मरी थी ।
इस घटनाके एक आरोपी ‘पी विल्सन’को बन्दी किया गया था, जो कि फसलों और मसालोंकी खेती करनेवाली एक ‘कम्पनी’का कर्मचारी था । इस घटनाके दो अन्य संदिग्ध अब्दुल करीम और उसका पुत्र रियासुद्दीन, जो उस ‘कम्पनी’के मालिक थे, वे बहुत समयतक लापता रहे । आरोपीने पूछताछके मध्य बताया था कि उन्होंने जंगली सूअरोंको डरानेके लिए फलोंके साथ पटाखोंका जाल बिछाया था; क्योंकि वे फसलोंको क्षति पहुंचा रहे थे । केरलमें यह प्रक्रिया बहुत सामान्य है, जिसके अन्तर्गत जंगली सूअरोंको भयभीत करनेके लिए फलोंमें पटाखे या विस्फोटक पदार्थ रखे जाते हैं ।
क्षुद्र मानसिकताके जिहादी व्यक्ति, मानवपर तो दया नही करते, तो क्या ये जंगली जानवरों, गायों, कुत्तों और हाथियोंपर करेंगे ? ये प्रायः जिहाद और ईशनिन्दाके नामपर मानव की गर्दनतक काट देते हैं । ऐसे लोग समाजपर कोढ हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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