१३ दिसम्बर, २०२०
इस घटनाके सम्बन्धमें ‘एएनआई’से बात करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अमजद उल्लाह खानने विस्तारसे जानकारी दी । उन्होंने बताया, “तेलंगाना स्थित मिसरीगंजके ‘लोकल एजेंट’ सैफीने भाग्यनगरकी ही ५ महिलाओंको दुबईके एक ‘शॉपिंग मॉल’में चाकरी दिलानेकी बात कही थी । अक्तूबर २०२० में उसने पांचों महिलाओंको तीन माहके ‘वीजा’पर दुबई भेजा और उन्हें दुबईकी ‘लेबर रिक्रूटमेंट कंपनी’में काम करनेवाले अल सफीरको सौंप दिया । इसके पश्चात प्रत्येक महिलाको २ लाख रुपएमें घरोंमें काम करनेवाली नौकरानी, अरब परिवारोंको विक्रय कर दिया गया !” महिलाओंकी स्थितिका उल्लेख करते हुए अमजद उल्लाहने बताया, “इन महिलाओंको पर्याप्त भोजन और रहनेका स्थान दिए बिना ही इनसे १५ घण्टोंतक काम करवाया जाता है । इन महिलाओंको बातें नहीं सुननेपर यातनाएं दी जाती हैं और यौन शोषण भी किया जाता है ! ये जबसे दुबई गई हैं, तबसे ही इन्हें वेतन भी नहीं मिला है ।”
उन्होंने भारत शासनसे निवेदन किया, वह शीघ्रातिशीघ्र इस प्रकरणमें हस्तक्षेपकर सहायता करें । अबू धाबी, यूएईमें भारतीय दूतावास और दुबईमें भारतीय वाणिज्य दूतावास सहायताके लिए आगे आएं, जिससे इन महिलाओंको इस कठिन परिस्थितियोंसे बचाया जा सके और इनकी देश वापसी सम्भव हो सके ।
जिहादियोंका महिलाओंके प्रति इनका क्या दृष्टिकोण है ?, यह हमने इतिहासकी पुस्तकोंमें पढा ही है और वर्तमानमें ‘इस्लामिक स्टेट’के जिहादियोंद्वारा ईराकमें महिलाओंका विक्रय करना । जिहादियोंका कोई धर्म है ही नहीं । ये केवल अन्य व्यक्तियोंकी परिस्थितियोंसे लाभ उठानेके लिए तत्पर रहते हैं । जिहादी सैफीको कठोरसे कठोर दण्ड मिले, इस हेतु सभी राष्ट्रवादी प्रयास करें और साथ ही और भी जो सैफी छुपे बैठे हैं, उन्हें भी शासन ढूंढकर निकालें । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
Leave a Reply