१४ दिसम्बर, २०२०
किसानोंके कथित आन्दोलनमें एक दृश्यपट ‘वायरल’ हुआ है, जिसमें कुछ प्रदर्शनकारी महिलाएं गा रही हैं, “मोदी मर जा तू, शिक्षा विक्रयकर खा गया रे मोदी, मर जा तू । देश विक्रयकर खा गया रे मोदी, मर जा तू । किसानोंकों धोखा दे गया रे मोदी, मर जा तू ।” उनके सामने बैठी महिलाएं दोहरा रही थीं, “हाय हाय मोदी, मर जा तू ।” यह दृश्यपट कहांका है, यह अभी ज्ञात नहीं हो सका है; परन्तु उनके पीछे अखिल भारतीय किसान सभाका (एआईकेएस) ‘बोर्ड’ तथा हथोडा चिह्न दृष्टिगत हो रहा है । यह एक वामपन्थी सङ्गठन है, जिसमें २ गुट हैं । एक भारतीय ‘कम्युनिस्ट पार्टी’ और दूसरा भारतीय ‘कम्युनिस्ट पार्टी’ (मार्क्सवादी) । देहली भाजपाके महासचिव कुलजीत सिंह चहलने इसे लज्जास्पद बताया है । इस दृश्यपटके ‘वायरल’ होते ही अनेक लोगोंकी प्रतिक्रियाएं आईं । किसीने उन्हें कांग्रेसी बताया, तो किसीने उन्हें दण्डित करनेकी इच्छा प्रकट की ।
इससे पूर्व ‘क्रिकेटर’ युवराज सिंहके पिता योगराज सिंहने किसान आन्दोलनमें उत्तेजक वक्तव्य दिए थे । एक पंजाबी समाचार वाहिनीसे बात करते हुए, उन्होंने प्रधानमन्त्री मोदीको दी गई हत्याकी धमकियोंका भी समर्थन किया था । उन्होंने इतिहासपर बात करते हुए यह भी कहा था कि इनकी महिलाओंको अहमद शाह दुर्रानी ले जाता और वहां ‘टके-टके’में उनका विक्रय करता, तो पंजाबियोंने इनकी रक्षा की ।
एक और दृश्यपट ‘वायरल’ हुआ है, जिसमें एक तथाकथित किसान कहता है कि जैसे इन्दिराको ठोक दिया (हत्या कर दी), वैसे मोदीको भी ठोक देंगे । जब यह वक्तव्य दिया जा रहा था, तो आम आदमी पार्टीके अमानतुल्ला खान वहां उपस्थित थे । दृश्यपटमें एक प्रदर्शनकारी कह रहा था कि वह ‘जय हिन्द’ अथवा ‘भारतमाताकी जय’ नहीं बोलेगा । वह ‘जो बोले सो निहाल’ बोलेगा, वह ‘अस्सलाम आले कोम’ भी बोलेगा ।
किसान आन्दोलनके नामसे कांग्रेसी, वामपन्थी तथा कुछ देशद्रोही देशकी शान्ति भंग करनेको प्रयासरत हैं; तभी तो वे कुछ देशद्रोहियोंको बन्दीगृहसे मुक्त करनेकी तक याचना कर रहे हैं । इस आन्दोलनमें खालिस्तान समर्थनके ‘पोस्टर्स’ भी देशद्रोहियोंकी उपस्थितीके सूचक हैं । इनकी मंशा रास्ता अडाकर शाहीन बाग आन्दोलनके समान देशको हानि पहुंचानेकी है । शासन इसका समय रहते दमन करे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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