आगरामें पशुओंकी ‘चर्बी’से कृत्रिम देशी घी बनानेकी ‘फैक्ट्री’ पकडी, अस्थियोंके (हड्डियोंके) साथ पांवऔर खुर भी मिले


१८ दिसम्बर, २०२०
    उत्तर प्रदेशमें आगरा जनपदके खंदौलीमें चल रही ‘फैक्ट्री’पर छापा मारनेसे पुलिसको भारी मात्रामें पशुओंकी अस्थियोंसे प्राप्त वसासे बने ‘देशी घी’के साथ ही पशुओंकी अस्थियां (हड्डियां), पांव और खुर मिले हैं । ‘फैक्ट्री’ संचालक सहित चारको बन्दी बनाया गया, जबकि दो भाग गए । घी बनानेमें कुल २३ रुपये प्रति किलोग्रामका व्यय आता है, जिसे व्यापारियोंको ६० रुपये प्रति किलोग्राम विक्रय किया जाता था । यही घी व्यापारी २०० प्रति किलोग्राममें विक्रय करते हैं ।
   पुलिस दलने मंगलवार तीसरे प्रहर यहां ‘फैक्ट्री’में छापामार कार्यवाही की । गैसके चूल्हेपर ‘चर्बी’ उबल रही थी और इसीमें वनस्पति घी और सुगन्ध मिलाकर ‘घी’ बनाया जा रहा था । पुलिसने यहांसे चार लोगोंको पकड लिया । पकडे गए आरोपियोंमें फैक्ट्री स्वामी चांद बाबू  व तीन श्रमिक शैफी, इरशाद और ताहिर सम्मिलित हैं । पासमें ही अवैध पशु हत्यागृह भी संचालित किया जा रहा था, जिसका संचालक धर्मान्ध साहिल अभी पलायन कर गया है ।
       जिहादी ऐसा घी बनाकर हिन्दुओंके घरोंमें भेज रहे हैं, यह भी तो एक जिहाद ही है । उत्तर प्रदेशमें व अन्य राज्योंमें खुलेमें ‘चर्बी’से घी बनाकर लोगोंका धर्मभ्रष्ट किया जा रहा है; परन्तु अधिकारी, पुलिस प्रशासन आदि मौन रहते हैं और कभी-कभी एक-दो पकडे जाते हैं, जबकि लोग भी इस बातसे अनभिज्ञ नहीं हैं, तदुपरान्त यह सब चल रहा है, यह लज्जाका विषय है । शासनको चाहिए कि इसे त्वरित बन्द करे ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया


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