इजरायल देशसे सीखते हुए संस्कृत भाषाको राष्ट्रभाषा बनाने हेतु उच्चतम न्यायालयमें याचिका


२० दिसम्बर, २०२०
      सर्वोच्च न्यायालयमें गुजरात शासनके पूर्व अतिरिक्त सचिव के जी वंजाराद्वारा प्रविष्ट की गई याचिकामें संस्कृत भाषाको भारत देशकी राष्ट्रभाषाके रूपमें अधिसूचित करने और हिन्दीको इसकी आधिकारिक भाषाके रूपमें रखनेका निर्देश देनेकी मांग की है ‌। वर्तमानमें गुजरात उच्च न्यायालयमें अधिवक्ता वंजाराद्वारा याचिकामें कहा गया है कि यह अधिसूचना संवैधानिक ढांचेको भंग किए बिना ही अधिनियम या कार्यकारी आदेशके द्वारा भी किया जा सकता है और आवश्यक नहीं कि राजभाषाको राष्ट्रीय भाषाके समान स्थान दिया जाए, दोनों निश्चित रूपसे भिन्न हो सकते हैं । इस प्रयाससे किसी भी धर्म या जातिके विरोधका सामना नहीं करना पडेगा ।
याचिकामें कहा गया है कि भारतको इजरायल देशसे सीखना चाहिए, जिसने वर्ष १९४८ में हिब्रूको (इब्रानी) भी आधिकारिक राष्ट्रीय भाषाके रूपमें अंग्रेजीके साथ रखा, जो कि पिछले २००० वर्षोंसे मृत भाषा है । इस पक्षमें कहा गया है कि संस्कृत बच्चोंमें मस्तिष्क, लयबद्ध उच्चारण और स्मरण रखनेकी क्षमताका विकास करती है ।
याचिकाके अनुसार, पूर्व प्रधानमन्त्रीने भी कहा था कि सबसे बडा कोष जो भारतके पास है और उसकी सबसे अच्छी धरोहर है, मैं बिना किसी संकोचके कहूंगा कि यह संस्कृत भाषाका साहित्य है ।
उल्लेखनीय है कि वर्तमानमें भारतीय संविधान किसी भी भाषाको देशकी राष्ट्रीय भाषाके रूपमें मान्यता नहीं देता है; परन्तु भारतमें २२ आधिकारिक भाषाएं हैं और वे भारतीय संविधानकी ८ वीं अनुसूचिके अन्तर्गत आती हैं ।
      भारतके सभी नागरिक संस्कृतकी रक्षा हेतु आगे आएं ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया


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