आंध्र प्रदेशके २३८४६ मन्दिर राज्य शासनके नियन्त्रणसे हों मुक्त, गिरिजाघर एवं मस्जिदोंके समान मिले अधिकार: पूर्व प्रशासनिक अधिकारियोंने की मुख्यमन्त्री जगनसे याचना
२३ दिसम्बर, २०२०
मन्दिरोंको राज्य शासनके नियन्त्रणसे मुक्त करनेके प्रयास हो रहे हैं । पद्मश्रीसे सम्मानित डॉ. टी. हनुमान चौधरीने कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियोंके संग मिलकर आंध्रप्रदेशके मुख्यमन्त्री जगन रेड्डीसे मांग की है कि प्रदेशके २३८४६ मन्दिर, जिनकी सम्पत्तियोंको आंध्र शासन नियन्त्रित करता है, उनका नियन्त्रण हिन्दुओंको सौंप दिया जाए । याचिकामें लिखा है कि इन मन्दिरोंके सम्पत्तिका मूल्य सहस्रों करोड रुपये है । हिन्दुओंको अपने मन्दिरोंके प्रबन्धनकी वही स्वतन्त्रता प्राप्त हो, जो मस्जिदोंको और गिरिजाघरोंको प्राप्त होती है । उन्होंने याचनामें लिखा है कि ३१ दिसम्बर २०२१ तक मन्दिरोंका नियन्त्रण हिन्दुओंको सौंप दिया जाए एवं आंध्र प्रदेश धर्मार्थ और हिन्दू संस्था अधिनियम १९८७ को निरस्त किया जाए । याचिकामें लिखा है कि हिन्दुओंके मन्दिरों और उनकी सम्पत्तियोंको धार्मिक व्यक्तियों और शासनके संग हिन्दू प्रतिनिधियोंको सम्मिलित करनेकी अनुमति देनी चाहिए । इस धनका उपयोग मात्र हिन्दू मन्दिरोंके रख-रखाव, विकास और हिन्दू समाजके धार्मिक लाभके लिए किया जाना चाहिए ।
उल्लेखनीय है कि आंध्र शासन ईसाइयोंके प्रति बहुत दयावान है । पिछले दिनों एक सांसदने एक ईसाई धर्मान्तरणको शासकीय संरक्षण दिए जानेका रहस्योद्घाटन किया था । एक ऐसे क्षेत्रमें गिरिजाघरका निर्माण हुआ था, जहां हिन्दू ही निवास करते हैं । जब ग्रामीणोंने इसपर आपत्ति की, तो उनका उत्पीडन किया गया ।
‘वायएसआरसीपी’के नेता रघु रामकृष्णा राजूने बताया कि शासनके अनुसार प्रदेशमें ईसाई जनसङ्ख्या भले ही २.५% है; परन्तु वास्तवमें वे २५% से न्यून नहीं हैं । आंध्र प्रदेशके ‘एनजीओ’ ‘लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम’के अनुसार राज्यके २९८४१ पादरियोंको ५००० रुपये मानदेय दिया गया । यह धन ‘डिजास्टर रिलीफ फण्ड’से दिया गया । उन्होंने यह भी बताया कि इनमें ७०% ऐसे हैं, जिनके पास अनुसूचित जाति/जनजातिके प्रमाणपत्र हैं । यह ज्ञात होनेपर केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मन्त्रालयने इसपर कार्यवाही हेतु आंध्र प्रदेशके अधिकारीको पत्र लिखा था ।
पूर्व प्रशासनिक अधिकारियोंकी यह याचना स्वागत योग्य है । कांग्रेस व अन्य हिन्दूद्रोही दलोंने सदैव धर्मनिरपेक्षताके नामपर हिन्दुओंसे भेदभाव किया है । अभीभी हिन्दुओंके मन्दिरोंमें दिए गए दानसे प्राप्त धनसे मस्जिदों, गिरिजाघरोंका अनुरक्षण (रखरखाव), पुनर्निर्माण आदि किया जाता है । इसके विपरीत मस्जिदों और गिरिजाघरोंके धनका उपयोग वे स्वयं अपनी इच्छानुसार करनेको स्वतन्त्र होते हैं; अतः हिन्दू मन्दिरोंपर लागू यह विधान आंध्र ही नहीं, प्रत्येक राज्यमें निरस्त हो एवं सर्वत्र इस हेतु जनजाग्रति हो । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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