एपीएमसी’ विधान न लागू करनेवाले केरलके ‘सीएम’ने भी दिया किसान आन्दोलनको खुला समर्थन
२४ दिसम्बर, २०२०
अब केरलने भी मोदी शासनद्वारा पारित तीन कृषि विधानोंके विरुद्ध हरियाणा-देहली सीमापर कुछ कथित किसानोंद्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनोंके समर्थनका निर्णय किया है । बता दें कि केरल वही राज्य है, जहांपर ‘एपीएमसी एक्ट’का कोई वैधानिक कार्य नहीं है ।
बुधवार २३ दिसम्बरको, केरलके मुख्यमन्त्री पिनरई विजयनने घोषणा की कि, राज्य शासन कृषि विधानोंके विरुद्ध आन्दोलनकारी किसानोंके साथ एकजुटतासे खडा है । केरलके मुख्यमन्त्रीने कहा कि, केन्द्रको किसानोंकी उचित मांगोंको सुनना चाहिए; क्योंकि विरोध दिन-प्रतिदिन सार्वजनिक समर्थन प्राप्त कर रहा है ।
बता दें कि मोदी शासनके विरुद्ध कथित किसान विरोधका समर्थन करनेसे पहले केरलमें माकपा नेतृत्ववाली ‘एलडीएफ’ शासनने केन्द्रके नए कृषि विधानोंपर वार्ता करनेके लिए २३ दिसम्बरको विधानसभाका एक विशेष सत्र बुलानेका निर्णय किया था । मन्त्रिमण्डलने निर्धारित सत्रसे पहले कृषि विधानोंपर वार्ता करने और उसे निरस्त करनेके लिए इस विशेष सत्रको बुलानेका सुनिश्चित किया था; परन्तु, केरलके राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खानने तीन केन्द्रीय कृषि विधानोंके विरुद्ध प्रस्तावपर चर्चा एवं प्रस्ताव पारित करनेके लिए राज्य विधानसभाका विशेष सत्र बुलानेकी आज्ञा देनेसे मंगलवार २२ दिसम्बर, २०२० को मना कर दिया ।
विडम्बना यह है कि, केरल शासनद्वारा ‘एपीएमसी’ सुधारोंका विरोध कर रहे किसानोंके लिए तथाकथित एकजुटताका कोई लाभ नहीं है; क्योंकि केरल राज्यमें कोई ‘एपीएमसी’ संरचना नहीं है, जो कि तथाकथित विरोध प्रदर्शनका मुख्य आधार है ।
इन आरोपोंपर प्रतिक्रिया देते हुए केरलके मुख्यमन्त्रीने कहा कि भले ही वहांपर ‘APMC’ संरचना नहीं है, परन्तु वे प्रदर्शनकारी किसानोंकी मांगोंका समर्थन करेंगे; क्योंकि केरल एक उपभोक्ता राज्य है और यदि देशमें खाद्यान्नकी कमी होगी, तो इसका सबसे अधिक प्रभाव केरलपर होगा; इसलिए वह किसान आन्दोलनका समर्थन कर रहे हैं ।
केरलमें कोई एपीएमसी’ विधान’ नहीं, पंजाबके कुछ असन्तुष्ट किसानोंने राष्ट्रीय राजधानीमें मोदी शासनके विरुद्ध विरोध प्रदर्शन करनेके लिए स्थान बना रखा है, जिसके कारण वहांके नागरिकोंको अत्यधिक कष्टोंका सामना करना पड रहा है । इस तथाकथित विरोध प्रदर्शनने त्वरित ही राजनीतिक रूप ले लिया है । विपक्षी दल, वामपन्थी प्रदर्शनकारी और खालिस्तानियोंने अपने व्यक्तिगत ‘एजेंडे’को बढावा देनेके लिए इस आन्दोलनको अधिकारमें कर लिया है ।
किसानोंके विरोध प्रदर्शनके मध्य ये देशद्रोही राजनीतिक दल, अपने स्वार्थके लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं । जबकि न इन्हें कृषिसे कुछ लेना है, न किसानोंसे । ऐसे अवसरवादी दल राजनीति ही नहीं, वरन देशसे बाहर फेंके जाने योग्य है और योग्य समय आनेपर इन्हें इनका स्थान भी अवश्य दिखाया जाएगा ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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