बेगूसरायमें मस्जिदकी भीत (दीवार) लांघकर आए मुसलमान युवकने महिलाको चाकूसे किया चोटिल, पुलिसका व्यवहार रहा नकारात्मक
२५ दिसम्बर, २०२०
बिहारमें एक मुसलमान मोहम्मद छोटूने पडोसी महिलाको चोटिल कर दिया । महिला अपने तीन बच्चोंके साथ अपने घरमें सो रही थी । मस्जिदकी भीत (दीवार) लांघकर मोहम्मद छोटू उसके घरमें घुस आया । उसने महिलाकी साडी उतारनेका प्रयास किया, जिससे वह अर्धनग्न हो गई । विरोध करनेपर उसने महिलापर चाकूसे कई बार प्रहार किया; किन्तु महिलाने चिल्लाकर आस-पासके ग्रामीणोंको एकत्रित कर लिया और बच्चोंने जागकर ग्रामीणोंके लिए द्वार खोल दिया । मोहम्मदने दुष्कर्मके प्रयाससे असफल होकर भागनेका प्रयत्न किया तो महिलाने साहस न त्यागकर, उसे भागने नहीं दिया, जिस कारण मोहम्मदने उसे चाकूसे अधिक बार चोटिल किया । ग्रामीणोंने उसे पकडकर पुलिसको सौंप दिया । पुलिसने चोटिल महिलाको चिकित्सालय भेज दिया ।
पुलिसने प्राथमिकी प्रविष्ट करनेके लिए आश्वासन दिया; किन्तु दो दिवस पश्चात उसे मुक्त कर दिया । प्राथमिकताके लिए महिलाने थानेमें जाकर प्रार्थना की; किन्तु पुलिसने उसे डांट-डपटकर भगा दिया । महिलाने बताया कि उसका पति उत्तर प्रदेशमें रेलवेमें सेवारत है और वह स्वयं तीन छोट-छोटे बच्चोंके साथ गांवमें रह रही है ।
वहांके क्षेत्रीय पार्षद एवं सक्रिय कार्यकर्ता कृष्णानन्दने बताया कि वह घर मस्जिदसे सटा हुआ है । कुछ समय पूर्व भी इसी प्रकार मस्जिदसे मुसलमान युवकने आकर महिलापर आक्रमण किया था; किन्तु मस्जिदसे वार्तालाप करके, भीत बढाकर प्रकरण शान्त कर दिया गया था । उन्होंने कहा कि अपराधीकी मुक्ति केवल न्यायालयद्वारा की जा सकती है । पुलिसद्वारा उसे मुक्त कर देनेका क्या अर्थ है ।
महिलाने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु और आरोपीके विरुद्ध कार्यवाही हेतु प्रार्थना की है ।
चोटिल होनेपर भी महिलाने जिहादीको भागने नहीं दिया, वह अपने साहसके लिए प्रशंसाकी पात्र है । अल्पसङ्ख्यकके नामपर जब जिहादियोंकी सङ्ख्या बढ जाती है तो वे शेष लोगोंपर आक्रमण करने आरम्भ कर देते हैं । ऐसे आक्रमकोंको उचित दण्ड दिया जाना चाहिए । बिहारकी पुलिसकी निष्कर्मणताने सिद्ध कर दिया है कि वे जिहादियोंसे भयभीत रहते हैं और हिन्दूओंको सुरक्षा प्रदान करनेमें असफल रहे हैं । ऐसे निष्क्रिय शासनका बहिष्कार किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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