उपद्रव पीडितोंको असत्य बोलनेके लिए दबाव बना रहा था सर्वोच्च न्यायालयका अधिवक्ता जिहादी महमूद प्राचा
२६ दिसम्बर, २०२०
देहली पुलिसके एक विशेष दलने न्यायालयसे आज्ञा (वारंट) लेकर बृहस्पतिवार, २४ दिसम्बरको देहली उपद्रव प्रकरणके सम्बन्धमें सर्वोच्च न्यायालयके अधिवक्ता और ‘ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’के सदस्य महमूद प्राचाके कार्यालयकी जांच की ।
पत्रकार राज शेखरने आज ‘ट्वीट’ किया कि न्यायालयने पहले प्राचाके विरुद्ध एक प्राथमिकी प्रविष्ट करनेका आदेश दिया था । महमूद प्राचापर आदेशसे छेडछाड करने और देहली उपद्रव पीडितोंको असत्य भाषण करनेके लिए दबाव बनानेका आरोप है ।
इसके अतिरिक्त महमूद प्राचापर एक आरोप यह भी है कि उसने एक अन्य अधिवक्ताके हस्ताक्षरवाला शपथ-पत्र आगे बढाया था; जबकि, उस अधिवक्ताकी मृत्यु तीन वर्ष पूर्व ही हो चुकी है ।
पत्रकार आदित्य मेननके अनुसार, पुलिसने प्रमाणित किया है कि वो महमूद प्राचाके ‘लॉ फर्म’की आधिकारिक ‘ईमेल आईडी’के ‘आउटकमिंग’ लिखितपत्रों और ‘मेटा डेटा’की जांच कर रही है ।
न्यायालयद्वारा इस प्रकरणमें देहली पुलिसको आदेश दिए जानेके पश्चात ही पुलिसने इस विषयमें जांच आरम्भ की । न्यायालयने देहली पुलिस अधीक्षकको निर्देश दिया कि अधिवक्ता प्राचाके विरुद्ध लगे समस्त आरोपोंकी जांचके लिए ‘स्पेशल सेल’ या अपराध शाखाको निर्देश दिया जाए ।
महमूद प्राचाके विरुद्ध साम्प्रदायिक घृणा भडकानेके लिए प्राथमिकी इसी वर्ष हुई थी ।
जुलाई माहमें प्राचा और शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद, दोनोंपर ‘एफआईआर’ प्रविष्ट की गई थी । दोनोंने ही एक ‘प्रेस कांफ्रेन्स’में मुसलमानों और ‘दलितों’को ‘आत्म-रक्षाके अधिकार’ और बन्दूक और ‘लाइसेंस’ आवेदन करनेको लेकर वक्तव्य दिए थे ।
महमूद प्राचाके विरुद्ध प्राथमिकीके उपरान्त भी, उनको लखनऊ मस्जिदके भीतर एक शिविरमें देखा गया था, जहां वह मुसलमान समुदायके लोगोंको प्रशिक्षण दे रहा था कि ‘लाइसेंस’के लिए किस प्रकार आवेदन कर आग्नेयास्त्रोंको कैसे प्राप्त कर सकते हैं ? महमूद प्राचाने इस वर्ष अगस्तके मासमें ‘CAA’ विरोधी प्रदर्शन पुनः प्रारम्भ करनेकी वार्ता भी की थी ।
मुसलमान समुदायका यह अधिवक्ता इस प्रकारके देशद्रोह कार्यमें लिप्त है व देशमें उपद्रव भडकानेका पूर्व नियोजन कर रहा है और वह एक अधिवक्ता है, सोचिए कि यह व्यक्ति कैसे किसी अभियोगकी ‘पैरवी’ करेगा ?; इसलिए ये लोग किसी पदके योग्य नहीं हैं, इन्हें कारावासमें होना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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