नहीं चाहिए आरक्षणकी बैसाखी, ‘सब्सिडी’ देकर हमें असहाय बनाना बन्द करो: मधु पासवान


२६ दिसम्बर, २०२०
     व्यवसायसे ‘ऑटो’ चालक, सीतामढी निवासी मधु पासवान स्वयं अनुसूचित जातिके होते हुए भी आरक्षणके विरुद्ध अपना स्वर मुखर कर रहे हैं । ‘ऑपइण्डिया’के  सम्पादक अजीत भारतीसे संवाद करते हुए उन्होंने बताया कि गांवके मुखियाके निधनके उपरान्त वे उनके श्राद्धकर्म भोजमें गए थे । वहां उन्होंने देखा कि निम्न जातिके लोगोंको अन्तमें भोजन करवाया जाता था । यह देख वे अपने सम्पूर्ण पासवान समाजको लेकर वहांसे चले गए । उन्होंने कहा कि वहांके सवर्ण समुदायके लोग अपनेसे आयुमें ज्येष्ठ लोगोंको भी सम्मान नहीं देते । मधु पासवानने स्मरण कराया कि भगवान श्रीरामने निषादराजको योग्य सम्मान दिया था ।
     उन्होंने यह भी बताया कि अब समाजमें परिवर्तन आया है । वे राजपूतोंके घर जल पीते हैं, उनके कार्यक्रमोंमें जाते हैं । नूतन पीढीमें यह समस्या नहीं है । उन्हें आयुमें उनसे छोटे सवर्ण, भैया-भाई जैसे सम्बोधनसे पुकारते हैं ।
       उनके पंचायतके पकडी गांवमें ईसाई ‘मिशनरी’ सक्रिय हुए हैं; इसलिए वे अपने मुशहर समाजको जागरूक करने हेतु प्रयासरत हैं । उन्होंने ‘जेएनयू’में लगाए गए देश विरोधी ‘नारों’की बात भी की ।
     वे आरक्षणके घोर विरोधी हैं । उनका मत है कि इस बैसाखीसे देश अग्रसर नहीं होगा; वरन पिछड जाएगा । उन्होंने कहा कि आरक्षणका विरोध करनेपर उनका बन्धु भी उनका विरोध करेगा, तो वे तलवार लेकर खडे हो जाएंगे । उन्होंने कहा कि ‘मिशनरी’ उनके समाजको धर्मपरिवर्तनके लिए धन देते हैं । ‘मिशनरी’के प्रयासोंको विफल करनेके लिए वे मुशहर समाजके बच्चोंको पढाते हैं । उनकी अपनी बहन शिक्षक बनी तो उन्होंने उससे कहा कि वह बच्चोंको क्या पढाएगी ? आरक्षणसे आए शिक्षकोंके बारेमें वे कहते हैं कि ये बच्चोंको पढाने हेतु सक्षम नहीं हैं । आरक्षणका विरोध करते हुए वे कहते हैं कि शिक्षामें संविधानके अनुसार समानताका अधिकार होना चाहिए । पद उसे ही दिया जाए, जो योग्य हो ।
     निर्धनता दूर करनेके लिए आरक्षण नहीं; वरन मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं । निर्धनोंको भूमि, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाएं, आरक्षणकी बैसाखी नहीं ।
        मधु पासवानने उचित कहा है । आरक्षणकी बैसाखी देशकी प्रगतिमें बाधक है । इससे जातिवादमें वृद्धि होगी, वैमनस्यमें भी वृद्धि ही होगी । कारण इससे योग्य बुद्धिमान विद्यार्थी पिछड जाता है, कम बुद्धिमान जाति प्रमाणपत्र लेकर अग्रसर हो जाता है । ऐसे निर्बुद्ध चिकित्सक, यान्त्रिक, उच्च पदस्थ ‘ऑफिसर’ विश्वसनीय नहीं हो सकते । आरक्षणके कारण समाजमें आई दूरीका लाभ ‘मिशनरी’ उठाते हैं । केन्द्रको इस सत्यको समझकर संविधानमें उचित परिवर्तनकर एक देश, एक विधान, समान अधिकार लाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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