सांसद बदरुद्दीनके बालगृहोंमें अलकायदाकी ‘फंडिंग’, ३०२ बच्चे लापता, बच्चियोंके कक्षमें पुरुष कर्मचारी
२६ दिसम्बर, २०२०
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोगने पाया है कि असम और मणिपुरमें बदरुद्दीन अजमलके मरकाजुल मारीफद्वारा सञ्चालित ६ बाल संरक्षणगृहोंमें ‘फंड्स’का अनुचित प्रयोग किया गया है । इनमेंसे एक बाल संरक्षणगृहको तो उस ‘एनजीओ’से ‘फंड्स’ मिले, जिसकी वैश्विक आतङ्की सङ्गठन ‘अलकायदा’से सम्पर्ककी जांचकी जा रही है । शुक्रवार दिसम्बर २५ , २०२० को ‘एनसीपीसीआर’ने कहा कि उसकी निरीक्षण समूहको बताया गया कि इन ६ बाल संरक्षण गृहमें ७७८ बच्चे रह रहे हैं ।
असमके विवादित सांसद बदरुद्दीन अजमलने इन बाल संरक्षण गृहोंकी स्थापना की है । लोकसभाके अन्तरजालपर उपलब्ध उनके बारेमें बताया गया है कि इनमें १०१० बच्चे रह रहे हैं । मरकाजुल मारीफके अन्तरजालपर इनमें १०८० बच्चोंके होनेकी बात बताई गई है । इस प्रकारसे संस्थाद्वारा दी गई जानकारी और अन्य आंकडे भिन्न-भिन्न हैं । ‘एनसीपीसीआर’का कहना है कि अन्यके ३०० बच्चोंके बारेमें ज्ञात करना आवश्यक है ।
वहांके अस्वच्छ व ‘अनहाइजेनिक’ प्रसाधन गृह, बालिकाओंके लिए असुरक्षा, बांसके डण्डेसे दण्ड देने सहित कई ऐसी वस्तुएं हैं, जिनके बारेमें ब्यौरमें बताया गया है । इनमेंसे अनेकमें ‘सीसीटीवी कैमरे’ भी नहीं हैं । इनका निर्माण भी बच्चोंकी सुरक्षाको लेकर जारी दिशा-निर्देशोंके अन्तर्गत नहीं किया गया है । इससे बच्चोंको प्रताडित किए जानेकी आशङ्का है । कर्मचारियोंने भी स्वीकारा है कि बच्चोंको शारीरिक रूपसे दण्ड दिया जाता है ।
इसी माहमें ‘ऑल इण्डिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट’के प्रमुख बदरुद्दीन अजमलद्वारा सञ्चालित ‘अजमल फाउंडेशन’के विरुद्ध असमके दिसपुर पुलिस स्टेशनमें प्रकरण प्रविष्ट किया गया है । गुवाहाटीके ‘सीपी’ एम.एस. गुप्तने बताया था कि यह प्रकरण सत्य रंजन बोराहद्वारा प्रविष्ट कराए परिवादके (शिकायतके) पश्चात प्रविष्ट किया गया था, जिसने ‘एनजीओ’पर विदेशी धन प्राप्त करने और सन्दिग्ध गतिविधियोंमें इसका प्रयोग करनेका आरोप लगाया था ।
आतङ्की आतङ्कियोंका साथ ही देंगे और उनके जैसे ही कार्य करेंगे, यह स्पष्ट है; परन्तु भारत ऐसे लोगोंको सिरपर बिठा लेता है, इसी कारण ये ऐसे कृत्य करते हैं । भारत शासनद्वारा ऐसे आतङ्कियोंपर कडी कार्यवाहीकर मृत्युदण्ड ही देना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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