घरका वैद्य – मूंगफली (भाग-७)


१८. रक्तकी कमीके लिए : मूंगफलीमें ‘फोलेट’की प्रचुर मात्रा होती है । यह नये लाल रक्तकण बनानेके लिए आवश्यक होता है । लाल रक्तकण ही ‘ऑक्सीजन’को सभी अङ्गोंतक पहुंचाते हैं । इनकी कमी होनेपर ‘एनीमिया’ अर्थात रक्तकी कमी हो सकती है, जो अनेक रोगोंकी कारण बन सकती है । महिलाओंके लिए गर्भावस्थामें ‘फोलेट’ अति आवश्यक होता है । इसकी कमीसे महिला तथा गर्भको हानि हो सकती है । नियमित मूंगफलीके सेवनसे इस प्रकारकी आशंकासे बचा जा सकता है ।

१९. पित्ताशयकी पथरीके लिए : गुर्देमें पथरी बननेके अतिरिक्त पित्ताशयमें भी पथरी बननेकी आशंका होती है । पित्ताशयमें पथरी बननेका मुख्य कारण ‘कोलेस्ट्रॉल’ होता है । मूंगफलीमें ‘कोलेस्ट्रॉल’ कम करनेकी प्रकृति होनेके कारण, यह पित्ताशयमें पथरी बननेकी आशंकाको भी न्यून करती है । वैज्ञानिक अनुसन्धानके अनुसार मूंगफलीका सेवन पुरुषों तथा स्त्रियों दोनोंके लिए लाभप्रद सिद्ध हो चुका है ।

२०. बच्चोंके लिए ‘फास्फोरस’ : मूंगफलीमें पाए जानेवाले ‘फास्फोरस’ शरीरकी कोशिकाओंके बनने तथा इनकी देखभालके लिए सहायक होता है । यह ‘कैल्शियम’के साथ मिलकर अस्थियों (हड्डियों) और दांतोंको सशक्त बनाए रखनेमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है । बच्चोंके लिए मूंगफली खाना बहुत लाभदायक हो सकता है । इससे बच्चोंके दांतोमें कोई दोष उत्पन्न नहीं होता । दांतोमें कृमि (कीडा) नहीं लगता और अस्थियां सबल बनती हैं । ‘फास्फोरस’ शरीरमें ऊर्जा उत्पादनके लिए भी आवश्यक होता है । यह अम्लके प्रभावको सन्तुलित करके रक्तका सन्तुलन सामान्य बनाए रखता है । ‘हीमोग्लोबिन’के लिए भी ‘फास्फोरस’ एक आवश्यक तत्त्व होता है । इस प्रकार मूंगफलीके अनेक लाभ हैं ।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution