‘एमनेस्टी इंडिया’के पूर्व प्रमुखने फैलाई घृणा, उच्चतम न्यायालयको बताया नपुंसक, लिखे अपशब्द


०९ जनवरी, २०२१
    ‘एमनेस्टी’के मानवाधिकार कार्यकर्ता और भूतपूर्व मुखिया आकार पटेलने उच्चतम न्यायालयका अपमान किया है । आकर पटेलने घृणात्मक ‘ट्वीट’द्वारा न्यायाधीशोंकी तुलना नपुंसकोंसे की है । उसने कहा कि जब न्यायपालिका स्वयं सङ्कटमें है तो न्यायाधीश पुरुषकी भांति खडे नहीं हो पाए । उसने कहा कि कार्यपालिकासे अधिक अधिकार  उच्चतम न्यायालयके पास हैं, तो भी वे प्रधानमन्त्री मोदीसे डरे हुए हैं और कायर हैं । इसके लिए हमें न्यायालयके आगे घुटने टेकने पडते हैं, जैसे यह ‘डेल्फी’की (युनानके देवताकी) कोई आकाशवाणी हो । उसने बार-बार ‘ट्वीट’कर, देशके सर्वोच्च न्यायालयको ‘हिन्दूराष्ट्रका सुप्रीम कोर्ट’ बताया । उपभोक्ताओंद्वारा विरोध करनेपर, उसने क्षमा मांगनेके पश्चात नपुंसक शब्द हटाकर, उसे अन्य अपशब्द लिखकर पुनः ‘ट्वीट’ किया ।
   आकार पटेलने पूर्व न्यायाधीश श्री. गोगोईपर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अपने पदका दुरुपयोगकर, प्रतिफलमें सांसद बनकर, राज्यसभामें पद ग्रहण किया है । रंजन गोगोईपर सहस्रों लोगोंको असममें प्रताडित करनेका भी उसने आरोप लगाया ।
    पटेलने देशके सर्वोच्च न्यायालयको ‘हिन्दूराष्ट्रका न्यायालय’ सम्बोधित करते हुए, न्यायाधीशोंके लिए अपशब्द लिखकर घृणा फैलाई ।
         आकार पटेल स्वयं ही मुसलमानों और हिन्दुओंके मध्य घृणा उत्पन्न करने और हिंसा भडकानेका कार्य करता रहा है । देशके सर्वोच्च न्यायालयको अपशब्द कहकर अपमान करना एक साधारण नागरिकके लिए, अपना अधम चरित्र दर्शाना है, जिससे और लोग भी ऐसा करने लगेंगे । ऐसे मानवाधिकारी कार्यकर्ता कठोरतम दण्डके पात्र हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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