एनसीइआरटी’में बिना किसी साक्ष्यके पढाए जा रहे औरंगजेब व शाहजहांद्वारा मन्दिर निर्माणका विषय हुआ उजागर
१४ जनवरी, २०२१
मुगलोंका महिमामण्डन मुख्यधाराकी ‘मीडिया’से लेकर ‘सोशल मीडिया’पर उदारवादियों और वामपन्थियोंद्वारा प्राय: किया जाता है । यहांतक भी कहा जाता है कि औरंगजेब जैसे आक्राताओंने भी भारतमें रहते हुए मन्दिरोंकी रक्षा की और उनकी ‘देखरेख’ की थी; परन्तु क्या आपको ज्ञात है कि विद्यालयोंमें जिस पाठ्यक्रममें हमें ‘एनसीइआरटी’ यह सब बातें दशकोंसे पढाते आई है, उसके पास इसकी पुष्टिके लिए कोई आधिकारिक विवरण ही विद्यमान नहीं है ।
इस ‘आरटीआई’में विशेष रूपसे उन स्रोतोंकी मांग की गई, जिनमें ‘एनसीइआरटी’की कक्षा-१२ की इतिहासकी पुस्तकमें यह बताया गया था कि ‘जब (हिन्दू) मन्दिरोंको युद्धके अन्तराल नष्ट कर दिया गया था, तब भी उनके जीर्णोद्धारके लिए शाहजहां और औरंगजेबद्वारा अनुदान दिए गए ।
डॉक्टर इन्दु विश्वनाथनद्वारा ‘एनसीइआरटी’द्वारा ‘आरटीआई’के अनुरोधके इस उत्तरकी प्रति ‘ट्वीट’ की है और इसपर प्रतिक्रिया करनेवाले सभी लोग अचम्भित हैं । इन्दु विश्वनाथनने अपने ‘ट्विटर’ थ्रेडमें लिखा है, “दूसरे शब्दोंमें, भारतीय विद्यालयकी पाठ्यपुस्तकें यह बता रही हैं कि ये आतताई वास्तवमें उदार और हिन्दुओंके प्रति दयावान थे; परन्तु इन पुस्तकोंको प्रकाशित करनेवाला सङ्गठन कोई साक्ष्य देनेमें असमर्थ है ।”
इन्दु विश्वनाथन लिखती हैं कि इसके पश्चात भी ये झूठ वैकल्पिक-वास्तविकता बनानेवाली ‘मशीनरी’का अंग बने हुए हैं और जब हिन्दू मात्र सत्यकी मांग कर रहा है तो इसके लिए उन्हें भयानक ‘इस्लामोफोबिक कट्टरपन्थियों’की संज्ञा दी जाती है ।
इस विषयमें सम्बन्धित सभी अधिकारी दण्डके पात्र हैं । भारत शासन इस विषयमें त्वरित संज्ञान ले और ऐसी सभी पाठयपुस्तकोंमें ऐसे झूठे प्रकरणोंको हटाए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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