देहलीमें १३ वर्षीय बालकका लिंग परिवर्तन करवाकर होता रहा बलात्कार
१६ जनवरी, २०२१
देहलीकी गीता ‘कॉलोनी’से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने लोगोंको झकझोरकर रख दिया है । यहां कुछ लोगोंने मिलकर १३ वर्षके बच्चेका बलपूर्वक लिंग परिवर्तन करवाया और लम्बे समयतक उसके साथ सामूहिक बलात्कार करते रहे ! पुलिसको जानकारी तब हुई, जब पीडित बच्चा आरोपियोंके बन्धनसे किसी प्रकार मुक्त हुआ और एक व्यक्तिने उसकी सहायता की ।
समाचारके अनुसार, बच्चेकी भेंट आरोपियोंसे लगभग ३ वर्ष पूर्व लक्ष्मी नगरमें एक ‘डांस इवेंट’में हुई थी, वहां आरोपियोंने शुभमसे (परिवर्तित नाम) मित्रता की और नृत्य सिखानेका कहकर उसे मंडावली ले गए । मंडावलीमें कुछ समय रहकर शुभमने नृत्य कार्यक्रममें भाग लिया, जिसके लिए आरोपी उसे पैसे देते थे ।
थोडे समय पश्चात आरोपी शुभमसे मंडावली रहनेका ही हठ करने लग गए । धीरे-धीरे वे लोग शुभमको मादक पदार्थ देने लगे और कुछ ही दिनोंमें उसका बलपूर्वक लिंग परिवर्तनके लिए शल्यचिकित्सा करवा दी । उस समय शुभमकी आयु १३ वर्ष थी । शुभमने पुलिसको बताया कि उसे चिकित्साके पश्चात ‘हार्मोनल’ औषधियां भी दी गईं, जिससे वो लडकी दिखने लगा ।
शुभमका लिंग परिवर्तन करवानेके पश्चात आरोपियोंने मिलकर उसका सामूहिक बलात्कार किया और पैसेके बदले दूसरे लोगोंसे भी उसका बलात्कार करवाया । बलात्कारके पश्चात उसे किन्नर बनाकर स्टेशनपर उससे भीख भी मंगवाई । शुभमने बताया कि अभियुक्त स्वयं भी महिलाओंके वस्त्र पहनकर देहव्यापार करते थे और आनेवाले ग्राहकोंको मार-पीटकर उनके पैसे छीन लेते थे ।
शुभम और उसका मित्र मार्च २०२० में ‘लॉकडॉउन’ लगनेके पश्चात किसी प्रकार आरोपियोंके बन्धनसे भाग निकले । इसके पश्चात शुभम अपने मित्रके साथ अपने घर पहुंचा, जहां शुभमकी मांने दोनोंको एक भाडेके घरमें रहनेका स्थान दिलवाया और वह स्वयं (माता-पिता) भी उनके साथ रहने लगे; परन्तु आरोपियोंकी दृष्टिसे दोनों पीडित अधिक दिनोंतक बच नहीं पाए ।
दिसम्बरमें आरोपियोंको शुभमके घरकी जानकारी हो गई । उन्होंने उसके घर पहुंचकर उसके साथ मारपीट की । उनके पैसे इत्यादि भी छीनकर उसे अपने साथ ले गए । इस मध्य शुभमकी मांको बन्दूक दिखाकर मौन रहनेकी धमकी भी दी गई । शुभमने बताया कि जानेके पश्चात चार लोगोंने पुनः उनके साथ दुष्कर्म किया !
यद्यपि, दो दिन पश्चात पुनः दोनों पीडित वहांसे भाग निकले और देहली रेलवे स्टेशन जाकर छुप गए । इस मध्य उन्हें एक ऐसा अधिवक्ता (वकील) मिला, जिसने दोनोंकी स्थिति देखकर उन्हें देहली महिला आयोगके कार्यालय ले गया, जहांसे उन्हें बचा लिया गया ।
क्रूरताकी सीमाको पार करता यह अत्याचार हमारे समाजके सत्यको दिखाता है कि हम किस सीमातक निकृष्ट हो चुके हैं । लिंग परिवर्तन करनेवाला कोई चिकित्सक ही होगा और बन्दूक भी बिना ‘लाइसेंस’की ही होगी, तो इन अपराधियोंके दोनों कार्य ही भ्रष्ट माध्यमकेद्वारा सिद्ध हो गए और बालकको पुनः ले जाना और मांका मौन रहना दिखाता है कि उन्हें वैधानिक व्यवस्थामें विश्वास ही नहीं है और होगा भी क्यों ? पुलिस आदिकी स्थिति तो किसीसे छुपी नहीं है । इस नरकमें जाते समाजको रोकना अब अत्यन्त आवश्यक है, इसके लिए धर्म आधारित शिक्षा आवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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