परमार वंशके राजभवनपर ‘निजी सम्पत्ति’का पटल लगानेवाले काजीपर अर्थदण्ड, स्थल रिक्त करनेका आदेश
१९ जनवरी, २०२१
विगत दिनों मध्य प्रदेशके विदिशा जनपद मुख्यालयसे ७० किलोमीटर दूर प्राचीन उदयपुर नगरमें लगभग एक सहस्र वर्ष प्राचीन परमार वंशके राजभवनपर लगे ‘निजी सम्पत्ति’वाले पटलको प्रशासनद्वारा हटा दिया गया था । अब इस प्रकरणमें ‘निजी सम्पत्ति’का पटल लगानेवाले मोहम्मद काजी सैयद इरफान अलीको न्यायालय ‘नायब तहसीलदार’की ओरसे आदेश जारी किया गया है ।
आदेशमें कहा गया है कि शासकीय भूमिपर अकारण अधिकार करने एवं भूमि अपने अधिकारमें रखनेके कारण सैयद इरफान अलीको उक्त भूमि ग्राम उदयपुरके खसरा संख्या ८२२, रकबा ०७९५ में से २० बाई ४० वर्गफुटसे अनधिकृत किया जाता है । इसके साथ ही उसपर धारा २४८(१) के अन्तर्गत ५००० रुपएका अर्थदण्ड भी लगाया गया है । यह आदेश १५ जनवरी २०२१ को जारी किया गया ।
आदेशमें कहा गया है कि एक सप्ताहके भीतर अर्थात कि २२ जनवरी २०२१ से पूर्व उक्त भूमिसे अपना अधिकार हटा लें ! उक्त भूमिपर किसी भी प्रकारकी कोई भी वस्तु या संरचना आदि नहीं होना चाहिए और अर्थदण्ड न्यायालयमें जमा करनेके लिए निर्देशित किया गया है । ऐसा नहीं होनेपर अतिक्रमण बलपूर्वक हटाने एवं अर्थदण्डकी राशि भू-राजस्वके शेषकी भांति उगाहनेकी बात कही गई है ।
इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया है कि यदि निश्चित समय सीमाके भीतर भूमिपरसे अतिक्रमण नहीं हटाया जाता है, तो भूमिमें स्थित फसल, निर्माण या भवन अधिग्रहित कर लिया जाएगा एवं न्यायालयके विवेक अधिकारसे धारा २४८(१) के अन्तर्गत निर्णय किया जाएगा । यदि निर्धारित दिनांकके पश्चात भी भूमिपर हस्तक्षेप जारी रहा तो २३ जनवरी २०२१ से ५०० रुपए प्रतिदिनके अनुसार जोडा जाएगा । इसके साथ ही यदि हस्तक्षेप न करनेके आदेशके समय सीमाके भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो उसपर धारा २४८ (२ ए) के अन्तर्गत ‘सिविल जेल’की कार्यवाही प्रस्तावित की जाएगी ।
मध्य प्रदेश शासन इस हेतु अभिनन्दनका पात्र है । आशा है कि सभी इससे सीख लेंगे और जिहादियोंद्वारा अतिक्रमित किए गए सभी क्षेत्रोंको छुडाएंगे; इनका मुख्य कार्य ऐसे ही भूमि जिहाद करना है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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