अशोका विश्विद्यालयके सहायक प्राध्यापकने किया भगवान श्रीरामका अपमान


२७ जनवरी, २०२१
        बंगालके नीलांजन सरकार नामक प्राध्यापकने भगवान श्रीरामका अपमान किया है । नीलांजन अशोका विश्वविद्यालयका राजनीतिक विज्ञानके प्राध्यापक पदपर सहायकके पदपर कार्यरत है । राष्ट्रपति ‘रामनाथ कोविंद’ने राष्ट्रपति भवनमें नेताजी सुभाषचन्द्र बोसके चित्रका उद्घाटन किया था । वामपन्थी पत्रकारोंने राष्ट्रपतिद्वारा उद्घाटित किए गए नेताजीके चित्रको, अभिनेता प्रसनजीत चटर्जीका चित्र बताया, जिसने ‘गुमनामी’ चलचित्रमें नेताजीका अभिनय किया था ।
        नीलांजनने भी उस चित्रको लेकर, मोदी शासनपर कीचड उछालनेका प्रयास किया । उसने भाजपा शासनकी भर्त्सना करते हुए, उसकी आडमें भगवान श्रीरामका अपमान किया; किन्तु कुछ समय पश्चात उसने अपना ‘ट्वीट’ हटा दिया, जिसमें लिखा था कि यह नेताजी नहीं; अपितु अभिनेता प्रसनजीतका चित्र है, जिसने बंगाली चलचित्रमें नेताजीका अभिनय किया था । उसका झूठ पकडा जानेपर, उसके पश्चात उसने आगे ट्वीट करते हुए लिखा कि नेताजीके कार्यक्रममें ‘जय श्रीराम’ चिल्लानेके पश्चात, स्वतन्त्रताके चरणमें राजनीतिज्ञोंका दिवालियापन ।
          नीलांजनका ‘ट्वीट’, कोलकताके ‘विक्टोरिया मेमोरियल’में हुए कार्यक्रमसे सम्बन्धित था, जहां नेताजीकी जयन्ती मनाई गई थी । वहांपर ‘जय श्रीराम’के उद्घोष होनेपर, ममता बनर्जीने उसे अपना अपमान बताया और कुछ सम्बोधन किए बिना ही वहांसे जाने लगी ।
         वामपन्थियोंकी नीति सदा ही किसी न किसीकी निन्दा करना और देवी-देवताओंका अपमान करना ही रही है । यद्यपि उनके दोगले चरित्र कुछ समयके भीतर ही पकडे जाते हैं और झूठे प्रमाणित हो जाते हैं, तथापि उन्हें लज्जा नहीं आती । पढानेके स्थानपर कुलषित मनसे कीचड उछालनेवाले शिक्षकोंको त्वरित पदच्युत किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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