भारतीय लोकतन्त्रको बना दिया ‘टूलकिट’, ग्रेटा थनबर्गकी एक चूकने किया षड्यन्त्र उजागर


०४ फरवरी, २०२१
     राष्ट्रीय राजधानी देहलीके सीमावर्ती क्षेत्रोंमें किसानोंद्वारा जारी विरोध प्रदर्शनके मध्य, कई अन्तरराष्ट्रीय कलाकारोंने अपना समर्थन दिया है । इसमें ‘पॉप गायिका रिहाना, साथ ही मिया खलीफा, थनबर्ग आदिने ‘ट्विटर’पर इसे लेकर ‘ट्वीट’ किए; परन्तु बुधवार, ३ फरवरीको ग्रेटा थनबर्गने अनजानेमें ही भातीय लोकतन्त्रको कलङ्कित करनेके इस वैश्विक षड्यन्त्रकी भी पोल खोल डाली । स्वीडिश ‘एक्टिविस्ट’ ग्रेटा थनबर्गने भारतमें चल रहे किसान आन्दोलनके समर्थनमें एक ‘ट्वीट’ किया; परन्तु कुछ ही समय पश्चात यह ‘ट्वीट’ ग्रेटाने हटा भी दिया । यद्यपि, तबतक बहुत देर भी हो चुकी थी । इस ‘डॉक्यूमेंट’से यह स्पष्ट हो गया है कि किसान आन्दोलन एक सोची समझी रणनीतिके साथ आरम्भ किया गया था और २६ जनवरीका उपद्रव भी इसी रणनीतिका भाग था । ‘ट्वीट’में ग्रेटाने लिखा था कि ‘हम भारतमें चल रहे किसान आन्दोलनके साथ एकजुटतासे खडे हैं ।’ इसके पश्चात उसने एक और ‘ट्वीट’ किया, जिसमें ‘गूगल डॉक्यूमेंट’की एक धारिका (फाइल) साझा की गई थी । इसमें भारतमें चल रहे किसान आन्दोलनको ऊर्जा देनेवाले ‘सोशल मीडिया’ अभियानका कार्यक्रम और रणनीति थी ।
ग्रेटा थनबर्गद्वारा किए गए ‘ट्वीट’के पश्चात इस ‘टूलकिट’के लिखितपत्रोंकी गोपनीयतामें परिवर्तनकर इसे ‘प्राइवेट’ कर दिया गया है, जिससे लोग इसमें छुपी जानकारी न जुटा सकें । यह भी कहा गया है कि २६ जनवरीके लिए जो योजना बनाई गई थी, वह समूचे विश्व और भारतमें वैसी ही रही । इनमेंसे कुछ सन्देश इस प्रकार हैं :
     विरोध प्रदर्शनमें भाग लें : २५ जनवरी तक ‘ईमेल’द्वारा एकजुटता दिखनेवाले चित्र/’वीडियो’ सन्देश साझा करें (देहलीकी सीमापर किसानोंके लिए एकजुटता सन्देश) ।
      डिजिटल स्ट्राइक : ‘#AskIndiaWhy’ वीडियो/फोटो सन्देश – २६ जनवरीको या उससे पहले । कृषि ‘बिल’का विरोध करनेके लिए प्रधानमन्त्री और कृषि मन्त्रीको अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व व्यापार संगठन और विश्व बैंकके साथ ‘टैग’ किया जाना है ।
     ४-५ फरवरी २०२१ को ‘ट्विटर स्टॉर्म’: ५ फरवरीतक या अधिकतम ६ फरवरीतक चित्र/’वीडियो’ सन्देश साझा करें ! उल्लेखनीय है कि ठीक ६ फरवरीके दिन ही किसानोंने राष्ट्रव्यापी चक्का जामकी भी घोषणा की है । स्थानीय प्रतिनिधियोंद्वारा भारत शासनपर दबाव बनानेमें अन्तरराष्ट्रीय दबाव बनानेका प्रयास करें ! इसमें लोगोंको भारतीय दूतावासों, स्थानीय शासकीय कार्यालयों या विभिन्न बहुराष्ट्रीय अडानी और अंबानी कम्पनियोंके कार्यालयोंमें एकजुटता विरोध प्रदर्शन आयोजित करनेके लिए भी दिशानिर्देश दिया गया है । इस मध्य भारतने किसानोंके विरोधपर विदेशी कलाकारोंके वक्तव्योंको ‘निहित स्वार्थ समूहों’का अंग बताया । भारत रत्न सचिन तेंदुलकर, गायिका लता मंगेशकर सहित ‘बॉलीवुड’से लेकर खेल जगतके अनेक लोगोंने भी इस अन्तरराष्ट्रीय षड्यन्त्रके विरुद्ध ‘ट्वीट’ किया है ।
           विदेशी अराजकतावादी शक्तियोंके षड्यन्त्रसे आज सम्पूर्ण राष्ट्र भली भांति परिचित हैं और यही वह शक्तियां है, जो आज भारतके भीतर बैठे देशद्रोहियोंके साथ मिलकर भारतकी छविको विश्व पटलसे नीचे गिरना चाहते हैं । जिससे भारत विश्वमें विकसित राष्ट्रोंके समूहमें न आ सकें, सभी राष्ट्रवादी इनसे सतर्क रहें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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