देहलीके ‘चिल्ड्रेन होम्स’से सम्बन्धित प्रकरणमें हर्ष मंदरपर बाल यौन शोषणको लेकर प्राथमिकी प्रविष्ट


०५ फरवरी, २०२१
      ‘सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज’द्वारा स्थापित दो ‘चिल्ड्रेन होम’पर ‘जुवेनाइल जस्टिस एक्ट’के गम्भीर उल्लङ्घन और अन्य अनियमितताओंके आरोपोंका परिवाद (शिकायत) मिलनेके पश्चात देहली पुलिसने महरौली पुलिस स्टेशनमें ‘CES’के संस्थापक हर्ष मंदरके विरुद्ध प्राथमिकी प्रविष्ट की है । उल्लेखनीय है कि हर्ष मंदर वही है, जो ‘यूपीए’के शासनमें सोनिया गांधीकी ‘नेशनल एडवाइजरी काउंसिल’के सदस्य हुआ करते थे, जिनके सम्पर्क इटलीकी गुप्तचर सेवा और इतालवी शासनसे सम्बन्धित सङ्गठन से भी रहे हैं ।
     ‘नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स’ने १ अक्टूबरको दोनों ‘चिल्ड्रेन होम’ उम्मीद अमन घर (लडकोंके लिए) और खुशी रेनबो होमका (लडकियोंके लिए) निरीक्षण किया था । इसके लिए दो दल बनाए गए थे, जिनकी अध्यक्षता स्वयं ‘NCPCR’की अध्यक्षा प्रियंका कानूनगोने की थी ।
      ‘NCPCR’को ‘उम्मीद अमन घर’में होनेवाले यौन शोषणके बारेमें ज्ञात हुआ, जिसका संचालन अमन बिरादरी ट्रस्ट करता है । ‘अमन बिरादरी ट्रस्ट’की स्थापना हर्ष मंदरने की थी । ‘NCPCR’को अपने निरीक्षणके मध्य लडकोंके घरपर उनके साथ हो रहे यौन शोषणके विषयमें ज्ञात हुआ । ‘रिपब्लिक टीवी’की जांचके अनुसार, आयोगने उल्लेख किया था, ”इन घरोंमें रहनेवाले बच्चोंकी स्थिति दयनीय है । आयोगने आगे कहा कि बच्चोंके यौन शोषणकी कई घटनाएं २०१२, २०१३ और २०१६ में लडकोंके घरके भीतर हुई थी । विगत समयमें आयोगको जानकारी मिली कि यौन शोषणके विषयमें जाननेके पश्चात भी इसके विरुद्ध प्राथमिकी नहीं लिखवाई गई  । आयोगको कथित ढंगसे निरीक्षणके समय यह भी ज्ञात हुआ कि विदेशी नागरिकोंद्वारा ‘होम’का ‘दौरा’ किया जाता था, जो वहां स्वैच्छिक सेवाएं प्रदान करते हैं । आयोगको यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन विदेशी नागरिकोंको घरोंमें स्वैच्छिक सेवाएं देने और बच्चोंके साथ बातचीत करनेकी अनुमति किस आधारपर दी गई है, जबकि उनकी (विदेशियों) भारत यात्रा किसी अन्य उद्देश्यों व धनके लिए होती है ।
        पाश्चात्य संस्कृति पूर्णतः भोगपर आधारित है । विदेशी भारतमें आकर अपनी वासनापूर्तिके लिए ऐसी संस्थाके संचालकोंसे सम्पर्क करते हैं जो धनके लिए अपने चरित्रको बेच डालता है । प्रशासनको इनपर कडी कार्रवाई करनी चाहिए, किसी भी प्रकार ऐसे कुकृत्य पुनः न हों, ऐसा सुनिश्चित करें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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