देहली उपद्रवमें पुलिसपर पिस्तौल ताननेवाले शाहरुखको न्यायालयने नहीं दी प्रतिभूति


०९ फरवरी, २०२१
      अभियाेजन पक्षकी ओरसे न्यायालयको बताया गया कि आरोपीके परिवारका आपराधिक इतिहास रहा है । उसका पिता साबिर अली मादक पदार्थके साथ वर्ष १९९४ व १९९५ में बन्दी बनाया जा चुका है । शाहरुखकी ‘अम्मी’के भी ‘ड्रग’ तस्करोंसे सम्बन्ध हैं ।
     वर्ष २०२० में देहलीके हिन्दू विरोधी उपद्रवके समय जाफराबादमें ‘हेड कॉन्स्टेबल’ दीपक दहियापर पिस्तौल ताननेके आरोपी शाहरुख पठानको कडकडडूमा ‘कोर्ट’ने प्रतिभूति देनेसे मना कर दिया । अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावतकी ‘कोर्ट’ने आरोपीका चित्र उस दिन घटनामें उसकी संलिप्तता और उसके व्यवहारके विषयमें बताती है ।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावतकी न्यायालयने शाहरुखकी ‘जमानत’ याचिका नकारते हुए कहा कि आरोपीका आचरण ‘जमानत’ देने योग्य नहीं है । यह तीसरा अवसर है, जब उसकी याचिका नकारी गई है । अभियोजन पक्षकी ओरसे प्रस्तुत अधिवक्ता डीके भाटियाने याचिकाका विरोध करते हुए न्यायालयको बताया कि पिछले वर्ष २४ फरवरीको जाफराबाद ‘मेट्रो स्टेशन’ और मौजपुर चौकके मध्य ६६ फुट ‘रोड’पर एक गुट जाम लगा रहा था । वहीं दूसरा गुट उन्हें जाम लगानेसे रोकनेका प्रयास कर रहा था । इसी मध्य दोनों गुट भिड गए थे और पथराव होने लगा था । इसी मध्य कुछ लोग हवामें पिस्तौल लहराते हुए पुलिसकर्मियोंपर गोली चलाने लगे थे ।
       आरोपी जिहादी शाहरूखके छायाचित्रको कोई अन्धा भी स्पर्शकर बता सकता है कि यह जिहादी केवल और केवल अपराध ही करना चाहता था, न कि भयभीत करनेका अभिनय; अत: न्यायाधीशका निर्णय सर्वथा उचित है और यदि अपराधी उच्च न्यायालयोंमें प्रतिभूतिके लिए जाता है तो हम आशा करते हैं कि ऊपरके न्यायालय भी ऐसा ही निर्णय देंगें; क्योंकि अपराधीको उसके अपराधका तर्कसंगत दण्ड मिलेगा, तो निश्चित ही अपराधोंमें भी न्यूनता आएगी और विधिको माननेवालोंका राज्य भी स्थापित होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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