भारतीय शासनके अधिनियमोंकी अवहेलना करनेपर ट्विटरके शीर्ष अधिकारियोंको बनाया जा सकता है बन्दी


१३ फरवरी, २०२१
        भारतीय शासनद्वारा ‘ट्विटर’को कुछ भारतविरोधी खातोंको प्रतिबन्धित करनेका आदेश दिया गया था । ‘ट्विटर’के अधिकारियोंने उनमेंसे कुछ खातोंको, कुछ समयके लिए रोककर पुनः खोल दिया था । उन ‘ट्विटर’ खातोंके माध्यमसे ‘किसानोंके नरसंहार’के उद्देश्यसे खालिस्तानी उग्रवादियोंने ‘ट्वीट’ किए, जिस कारण देशको अत्यधिक हानि उठानी पडी । उन खातोंको प्रतिबन्धित न करके, ‘ट्विटर’ने उसे अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रता बताया और भारतीय शासनके आदेशोंका उपहास उडाते हुए, अधिनियमोंका पालन करनेसे मना कर दिया ।
         ‘ट्विटर’ने कहा कि वह प्रधानमन्त्रीके उन आदेशोंका पालन नहीं करेगा; क्योंकि उसके अनुसार यह आदेश भारतीय नियमोंके अनुरूप नहीं है; इसीलिए ‘आईटी’ मन्त्री रविशंकर प्रसादने ‘ट्विटर’के इस वक्तव्यको निरस्त कर दिया है । मन्त्रीने कहा कि वे भारतमे सहर्ष कार्य कर सकते हैं; किन्तु उन्हें भारतीय संविधान और अधिनियमोंका पालन करना होगा ।
        भारतीय शासनने अमेरिकाके ‘कैपिटल हिल’ और भारतमें लाल किलेमें हुए उपद्रवोंपर दोहरे मापदण्ड अपनाने एवं शासकीय आदेशोंका उल्लङ्घन करनेपर कठोरता अपनानेका निर्णय लिया और कहा कि यह बातचीतका विषय नहीं है; अपितु भारतका संवैधानिक अधिनियम है । केन्द्र शासनके अनुसार, ‘ट्विटर’ अपने नियम बना सकता है; किन्तु भारतीय संसदमें पारित अधिनियमोंका पालन करना होगा, ‘ट्विटर’के अपने नियम व दिशानिर्देश चाहे कुछ भी हों ।
         सहस्रों लोगोंने ‘ट्वीट’ किया ‘बैन ट्विटर’, ‘कू ऐप्प’ । अनेक लोगोंका मानना है कि ‘ट्विटर’ने भारतीय शासनसे टकरावकर अपने पांवपर ही कुल्हाडी मारी है । २०२० में ‘ट्विटर’को १.१४ ‘बिलियन डॉलर’की हानि हुई थी और अब उसे भारत जैसे देशके साथ टकरावसे और भी अधिक हानि होनेकी आशंका है ।
        उल्लेखनीय है कि कैपिटल हिलमें हिंसा होनेपर ‘ट्विटर’ने राष्ट्रपति ‘ट्रम्प’का खाता बन्द कर दिया था, जबकि भारतमें उपद्रव करनेवाले देशद्रोहियोंद्वारा, अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रता बताकर, हिंसाको बढावा दिया ।
     सन्धि हो जानेपर भी, भारत शासनको ‘ट्विटर’को बन्द कर देना चाहिए और स्वावलम्बी भारतमें ‘ट्विटर’ जैसा अपना नूतन ‘ऐप्प’ प्रचलित करना चाहिए, जिससे देशका कोट्यावधि धन देशसे बाहर जानेके स्थानपर, उनका देशमें ही उपयोग होगा और विदेशी संस्थानोंकी पराधीनतासे स्वतन्त्रता मिलेगी । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया


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