हरसिमरत बादलका असत्य वक्तव्य, किसान आन्दोलनको हिन्दू-सिख विवादमें परिवर्तित करनेका कुप्रयास


 १३ फरवरी, २०२१
           पूर्व मन्त्री तथा वर्तमानमें शिरोमणी अकाली दलकी नेता हरसिमरत कौर बादलने ९ फरवरी, २०२१ को लोकसभामें कृषिविधान तथा किसान आन्दोलनपर वक्तव्य देते हुए अनेक असत्य कथन किए । उन्होंने केन्द्र शासनपर अनेक असत्य आरोप लगाए । उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलोंने किसानोंपर जलकी बौछार करते हुए ‘आंसू गैस’ तथा गोलियां भी चलाईं । उन्होंने कहा कि पुलिसने निःशस्त्र किसानोंपर बल प्रयोग किया, जबकि सत्य यह है कि २६ जनवरीको किसानोंने अपने पूर्व निश्चित मार्ग परिवर्तित करते हुए, देहलीकी ओर ‘ट्रैक्टर’ लाकर पुलिसद्वारा बनाए अवरोधक ध्वस्त कर दिए । पुलिसकर्मियोंको ‘ट्रैक्टर’से रौंदनेके प्रयास किए । पुलिसपर डण्डे, तलवार आदिसे आक्रमणकर उन्हें चोटिल किया, महिला पुलिससे निर्दयता की ।
     हरसिमरत बादलने कहा कि ७५ दिनोंसे अधिक समयसे हो रहे आन्दोलनपर केन्द्र शासनने किसानोंसे वार्तालापके प्रयास नहीं किए; जबकि केन्द्र शासन ११ बार वार्ताके प्रयास कर चुका है । किसान ही कृषि विधानोंको पूर्णतया समाप्त करनेका हठ कर रहे हैं; जबकि यह विधान किसानोंके विकासके उद्देश्यसे केन्द्र शासनके दोनों सदनोंमें पारित करवाए गए हैं ।
        हरसिमरतने सिखोंके पवित्र ध्वजपर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि यह चिह्न गुरुद्वारोंकी यात्रामें अनेक विदेशी नेताओं तथा हमारे प्रधानमन्त्रीद्वारा भी धारण किया जाता है, जबकि लालकिलेपर खलिस्तानी समूहोंके ध्वजसे मिलता जुलता ध्वज भी फहराया गया था । हरसिमरतने कहा कि सिखोंने तिलक तथा जनेऊ धारण करनेवालोंकी सदैव रक्षा की है; अब हिन्दू, सिख गुरुओंका अपमान कर रहे हैं । यह भी नितान्त असत्य वक्तव्य था । किसी ‘मीडिया’कर्मीने भी सिखोंको दोष नहीं दिया ।
       पाकिस्तान पोषित खालिस्तानी आतङ्कियोंद्वारा किए गए उपद्रवपर, भारतके तिरंगे ध्वजके अपमानपर, सुरक्षा कर्मियोंपर किए गए आक्रमणपर मौन धारणकर हरसिमरत कौरद्वारा राजनीतिक स्वार्थके अन्तर्गत किया गया वक्तव्य लज्जास्पद है । राजीनीतिक महत्वाकांक्षाके कारण देशद्रोही गतिविधियोंको दिया गया समर्थन देशके नागरिक कभी मान्य नहीं करेंगे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया


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