किसान आन्दोलनको बताया गया पंजाबकी स्वतन्त्रताका, ‘खालिस्तान जिंदाबाद’के घोष व हुतात्मा भगत सिंहका मंचसे किया गया अपमान


१४ फरवरी, २०२१
      किसान आन्दोलनमें सम्मिलित कट्टर सिख सङ्गठनोंद्वारा शुक्रवार, १२ फरवरीको शिरोमणि अकाली दलके नेतृत्वमें खालिस्तानी पृथकतावादी जरनैल सिंह भिण्डरावालाकी जयन्तीका कार्यक्रम मनाया गया । इसमें ‘खालिस्तान जिंदाबाद’के घोष किए गए तथा किसान आन्दोलनको समुदाय व पंजाबकी स्वतन्त्रताका आन्दोलन बताया गया । वहीं राष्ट्रीय ध्वज तिरंगेका अपमान करनेवाले आरोपियोंके परिजनको भी सम्मानित किया गया व कार्यक्रमका सीधा प्रसारण ‘फेसबुक’के माध्यमसे हुआ । देहलीकी सीमाओंपर जारी कथित किसान आन्दोलनके मध्य इस कार्यक्रमका आयोजन ‘एसएडी’ अमृतसरके अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मानकी ओरसे फतेहगढ साहिबमें किया गया । इस कार्यक्रममें भिण्डरावालेका गुणगान व भारत शासनके विरुद्ध विष उगला गया । कार्यक्रममें अत्यधिक सङ्ख्यामें लोग उपस्थित थे, जो ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ व भिण्डरावालाके सम्मानमें घोष कर रहे थे । वही तिरंगेका अपमान करनेवाले आरोपी जोगराज सिंहके दादा सरदार मेहल सिंह एवं अन्य आरोपीके भाईको भी ‘मंच’पर सम्मानितकर ५० सहस्र रुपए प्रदान किए गए । इसी मध्य बलजीत सिंह खालसा भंगारवालेकी पुस्तक ‘राज करेगा खालसा’का भी विमोचन किया गया, जो खालिस्तानी विचारधाराको प्रोत्साहित करती है । सरदार सिमरनजीत सिंह मानने ‘मंच’से वहां बैठे लोगोंसे शपथ दिलवाई कि लालकिलेपर सामुदायिक ध्वज प्रत्येक पंजाबीने चढाया है । मानने कहा कि २६ जनवरीकी हिंसाको लेकर प्रविष्ट किए गए अभियोग यदि मोदी शासनने १० दिनके भीतर नहीं लिए, तो फतेहगढ साहिब गुरुद्वारेसे ७ सिखोंको प्रधानमन्त्रीके कार्यालय भेजा जाएगा, जो सामुदायिक ध्वज फहरानेका दायित्व लेंगे और कहेंगे कि जो करना है, कर लो । खालिस्तानी जसकरण सिंहने मंचसे लोगोंको भडकाते हुए कहा कि यदि आपको खालिस्तान बनाना है तो इसके लिए आपको जरनैल सिंह भिण्डरावालेकी बातको स्मरण करना होगा, जिन्होंने कहा था कि जिस दिवस दरबार साहिबपर प्रहार होगा, उसी दिन खालिस्तानकी नींव रखी जाएगी । उनके अनुसार, खालिस्तान कहना बोलना व सुनना सब मानवतावादी ही है । उन्होंने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीके लिए आतङ्कवादी शब्दका भी प्रयोग किया । जसकरणने यह भी कहा कि भगत सिंहतो ‘इंडिया’के लिए हुतात्मा हुए थे; परन्तु समुदायके लिए जरनैल सिंह भिण्डरावालाने प्राण त्यागे हैं । उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रमके आयोजनमें मुख्य भूमिका निभानेवाले व लोगोंको भडकानेवाले खालिस्तानी वरिंदर सिंह सेखों गाजीपुर ‘बॉर्डर’ स्थित राकेश टिकैतके ‘मंच’पर भी उपस्थित था । वह शिरोमणी अकाली दल अमृतसर ‘यूथ विंग’का प्रधान भी है तथा २६ जनवरीको हुए उपद्रवमें भी  सम्मिलित था ।
      किसान आन्दोलनके मध्य नित्य होते प्रकरण व ‘मंच’से प्रसारित होते वक्तव्योंसे यह पूर्णतः स्पष्ट हो चुका है कि आन्दोलन किसानोंका नहीं, अपितु खालिस्तानियोंका है । अब शासनको शीघ्र अति शीघ्र कठोर निर्णय लेकर इसे और प्रसारित करने से रोकना होगा; अन्यथा आनेवाले कालमें परिणाम घातक सिद्ध हो सकते हैं ।  – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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