छत्तीसगढ कांग्रेस शासनद्वारा ‘कोरोना वैक्सीन’ भेजनेपर आपत्ति


१४ फरवरी, २०२१
     छतीसगढके कांग्रेस शासनने ‘कोरोना वैक्सीन’की आपूर्तिपर रोक लगानेकी मांग करते हुए भारतीय शासनसे स्पष्ट रूपसे कहा कि ‘कोवैक्सीन’की आपूर्तिपर रोक लगा दी जाए ।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मन्त्री डॉ. हर्षवर्धनने गुरुवार, ११ फरवरीको छत्तीसगढके स्वास्थ्य मन्त्री टीएस सिंह देवसे कहा कि ‘कोवेक्सिन’ और ‘कोविशील्ड’ दोनों ही ‘वैक्सीन’ सुरक्षित हैं । महामारीका प्रसार रोकनेके लिए इनका शीघ्रातिशीघ्र प्रयोग आवश्यक है । वास्तवमें ‘कोवैक्सीन’के परीक्षणपर चिन्ता प्रकट करते हुए टीएस सिंहने केन्द्रीय स्वास्थ मन्त्रीको पत्रमें लिखा, “मैंने उनसे (केन्द्रीय स्वास्थ्य मन्त्री) अनुरोध किया है कि जबतक हमारे स्वास्थ्य विभागकी सहमतिसे जुडे पक्षोंपर विचार नहीं किया जाता, तबतक छत्तीसगढमें ‘कोवैक्सीन’की आपूर्ति नहीं की जाए, जिससे औषधिकी आरम्भिक मात्राकी समयावधि न निकले और उसे नष्टसे बचा जा सके ।”
        केन्द्रीय स्वास्थ्य मन्त्री डॉ. हर्षवर्धनने टीएस सिंहकी इस बातका उत्तर देते हुए कहा कि स्वास्थ्य मन्त्रालयने ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट’ १९४०के ‘न्यू ड्रग्स एंड क्लिनिकल ट्रायल्स रूल्स’ २०१९ के अन्तर्गत इस ‘वैक्सीन’का परीक्षण किया गया है । दोनों ही ‘वैक्सीन’ सुरक्षित और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढानेवाली हैं । महामारीका क्षेत्र बढनेसे रोकनेके लिए भी यह एकमात्र प्रभावी विकल्प है ।
    केन्द्रीय स्वास्थ्य मन्त्री अनुसार, ‘कोवैक्सीन’पर ‘एक्सपायरी’ दिनांक नहीं होनेकी कांग्रेस स्वास्थ्य मन्त्रीकी चिन्ता निराधार है; क्योंकि इसकी शीशियोंपर ‘लेबल’ लगाकर यह जानकारी दी गई है ।
 दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, जापान, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंडभी भारतकी ‘वैक्सीन’के लिए प्रतीक्षारत हैं । भारतीय शासन अपने पडोसी नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार समेत कई पडोसी देशोंको पूर्व ‘वैक्सीन’की खेप भेजनेके तहत कई देशोंको ‘वैक्सीन’की आपूर्ति भी की जा चुकी है ।
      कांग्रेस शासनके इस वक्तव्यसे इसकी निकृष्ट मानसिकताका परिचय मिलता है, यहां भी उन्हें राजनीति करनी है ! लोगोंके प्राणोंसे खेलकर ऐसी भद्दी राजनीतिकी अपेक्षा कांग्रेससे ही की जा सकती है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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