अक्तूबर १५, २०१८
हरियाणाके पलवल जनपदमें स्थित एक मस्जिदका निर्माण कथित रूपसे हाफिज सईदके संगठन ‘लश्कर-ए-तैयबा’के पैसोंसे बनानेका प्रकरण सामने आया है ! राष्ट्रीय सुरक्षा विभागकी (एनआईए) जांचके पश्चात यह मस्जिद सुरक्षा विभागकी दृष्टिमें आ गई है । मस्जिद ‘खुलाफा-ए-रशीदीन’ पलवल जनपदके उत्तावरमें स्थित है । नई दिल्लीमें आतंकी वित्त पोषणके (फंडिंग) आरोपमें इस मस्जिदके इमाम मोहम्मद सलमान सहित तीन लोगोंको बन्दी बनाया गया था । इसके पश्चात ३ अक्तूब को एनआईएने मस्जिदका अन्वेषण किया । इस समूचे प्रकरणपर स्थानीय लोगोंका कहना है कि मस्जिद जिस भूमिपर बना है, वह विवादित है । उन्हें सलमानके ‘लश्कर-ए-तैयबा’के साथ सम्बन्धोंकी जानकारी नहीं है । वहीं, एनआईए मस्जिदके कर्मचारियोंसे पूछताछ कर रही है । साथ ही खाता-बहीकी भी जांचकी जा रही है । मस्जिद बनानेके लिए मिली राशिके विवरण व अन्य लिखितपत्रोंको अधिकृत (जब्त) कर लिया गया है ।
‘एनआईए’द्वारा सलमान (५२ वर्षीय), मोहम्मद सलीम और साजिद अब्दुल वाणीको २६ सितम्बरको लाहौर स्थित ‘फलाह-ए-इंसानियत’ (एफआईएफ) संस्थासे, जिसकी स्थापना हाफिज सईदके जमात-उद-दावाकेद्वारा (लश्करका मूल संगठन) की गई थी, आतंकी गतिविधियोंके लिए पैसे लेनेके आरोपमें बन्दी बनाया गया था । सूत्रोंके अनुसार, एनआईएकी जांचमें यह पाया गया है कि कथित रूपसे सलमानने पलवलमें मस्जिद बनानेके लिए ‘एफआईएफ’से रूपये लिए । एक एनआईए अधिकारीने बताया, “सलमानने, जो कि दुबईमें रहनेके मध्य ‘लश्कर-ए-तैयबा’से जुडे व्यक्तिके सम्पर्कमें आया, ‘एफआईएफ’से पैसे लिए ! उत्तवरमें मस्जिद बनानेके लिए ७० लाख रुपये ‘एनजीओ’द्वारा दिए गए ! इसके साथ ही सलमानकी पुत्रियोंके विवाहके लिए भी पैसे मिले ! हम अब इस बातकी जांच कर रहे हैं कि मस्जिदको पैसा कहां-कहांसे मिला और इसका उपयोग कैसे हुआ ?”
अधिकारीने बताया कि सलमान, जो कि उत्तावरका निवासी है, वह बचपनसे ही दिल्लीमें रह रहा था । उसने मस्जिद निर्माणके लिए सबसे अधिक धन एकत्र किया । सूत्रोंके अनुसार, ग्रामीणोंने मस्जिद निर्माणके लिए लगभग १० एकड भूमिकी व्यवस्था की । वहीं, निर्माणके लिए पैसे सलमानद्वारा दिए गए । ‘एनआईए’ने आरोप लगाया कि यह पैसा वास्तवमें ‘एफआईएफ’से आया था ! ग्रामीणोंको इस बात की जानकारी नहीं थी कि मस्जिद निर्माणके लिए पैसा कहांसे आया ? ग्रामीणोंको प्रतीत हुआ कि यह पैसा सलमानने स्वयं दिया है । सितम्बरमें सलमानको बन्दी बनानेके पश्चात ‘एनआईए’ने अपने अधिकारिक वक्तव्यमें कहा था, “जांचके मध्य यह पाया गया कि एक माेहम्मद सलमान दुबईमें रहने वाले एक पाकिस्तानी नागरिकसे निरन्तर सम्पर्कमें है । वह पाकिस्तानी नगारिक ‘फलाह ए इंसानियत’ संस्थाके डिप्टी चीफसे सम्पर्कमें है । आरोपी व्यक्ति ‘एफआईएफ’द्वारा धन प्राप्त कर रहा है और हवाला कारोबारमें लिप्त है ।” हालांकि, इस सत्यका प्रकटीकरण होनेपर ग्रामीण सहजताके साथ यह विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि सलमान इस प्रकारकी गतिविधिमें संलिप्त है ।
“ग्रामीण विश्वास क्यों करेंगे, वे तो धर्मनिरपेक्षता नामक पट्टी बांधे है ! हिन्दुओंका ह्रास इस गतिसे हुआ है कि हरियाणा सदृश क्षात्रसम्पन्न राज्यमें भी धर्मान्ध पैर पसारने और मस्जिदें बनाने लगे हैं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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