इस देशमें एक ‘चपरासी’की चाकरी पाने हेतु भी कुछ योग्यताओंकी आवश्यकता होती है और उसकी परीक्षा होती है, तो इस देशपर राज्य करने वाले राजनेताओंके लिए कोई भी योग्यताका आधार क्यों नहीं निर्धारित किया गया है ? कोई भी एक दिवस अकस्मात राजनेता बनकर इस देशकी राजनीतिके दृश्य पटलपर आ जाता है । कभी कोई गुण्डा, क्रिकेटर, कभी कोई अभिनेता, कभी कोई व्यापारी, कोई भी अनपढ राजनेता बन जाता है, जिसे समाज चयनित नहीं करता । उसे कुछ दल अपनी स्वार्थसिद्धि हेतु नियुक्तकर संसद भवनमें पहुंचा देते हैं । आजकी राजनीतिमें आने हेतु किसी भी प्रकारकी कोई योग्यताकी आवश्यकता ही नहीं होती है अर्थात ‘चपरासी’की पदवीसे भी निकृष्ट पदवी राजनेताओंकी हो गई है । कमसे कम आजके परिदृश्यसे तो यही समझमें आता है । ऐसा समाज यदि थोडे कालमें अराजक हो जाए तो कृपया आश्चर्य न करें !
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