विविध सन्त एवं सम्प्रदायके धार्मिक मासिकमें अनेक बार सिक्थ-वर्तिकासे (मोमबत्तीसे) दीप प्रज्ज्वलन कर रहे हैं, इस प्रकारका छायाचित्र प्रसिद्ध होते हुए हमें दिखाई देता है । दीप प्रज्ज्वलन तमोगुणी सिक्थ-वर्तिकासे नहीं; अपितु सात्त्विक तेलके दियेसे (सकर्ण दीप) करना चाहिए, यह धर्मशास्त्र कहता है । सन्तोंको धर्मशिक्षण नहीं होनेके कारण और भारतीयोंपर अंग्रेजोंकी ईसाई संस्कृतिकी पकड होनेके कारण, उनसे सिक्थ-वर्तिकासे दीप प्रज्ज्वलन करने जैसी अशास्त्रीय कृति होती है । इससे समझमें आता है कि हिन्दू धर्ममें सन्तोंको भी धर्मशिक्षण देनेकी कितनी आवश्यकता है ! – परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
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