आए दिन बहिर्मुख नेतागण उत्तरदायित्वहीन वक्तव्य देते हुए कहते हैं, ‘सेनाके जवान हैं, जान तो जाएगी ही !’
देशकी रक्षाके क्रममें प्राणोंकी आहुति देनेवाले सैनिकोंके विषयमें ऐसे उत्तरदायित्वहीन एवं निर्दयी वक्तव्य करनेवाले नेता क्या कभी प्रजाका भला कर सकते हैं ? हमारे सैनिक प्रतिदिन किसी न किसी आक्रमणमें सीमापर या कश्मीरमें हुतात्मा हो रहे हैं और इस क्रमको हमारे राज्यकर्ता रोकनेमें असफल रहे हैं, इस बातका क्षोभ व्यक्त करनेके स्थानपर इस प्रकारका वक्तव्य यह दर्शाता है कि आजके राज्यकर्ताओंमें मानवीय मूल्योंकी कितनी न्यूनता है, प्रजासे पितृवत स्नेह करनेवाले, उनके दुःखोंको समझनेवाले राज्यकर्ताओंकी आज अत्यधिक आवश्यकता अनुभव हो रही है, इस हेतु हिन्दू राष्ट्रकी शीघ्र स्थापना अब एकमात्र पर्याय है ।
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