‘इस्लामी’ आतङ्कवादियोंका पक्ष ले रहा ‘ट्विटर’, पत्रकार आरती टिक्कूने ‘ट्विटर’को न्यायालयमें खडा किया, भाईके जीवनको सङ्कट बतानेपर खाता कर दिया था बन्द
०७ जनवरी, २०२२
सूचनापत्र जालस्थल ‘द न्यू इण्डियन’की सह संस्थापक पत्रकार आरती टिक्कू सिंहने ‘ट्विटर’द्वारा अपना खाता निलम्बित करनेके विरुद्ध देहली उच्च न्यायालयकी ओर मार्ग किया है । उन्होंने ‘ट्विटर’के निर्णायककों निष्कासित करनेका अनुरोध करते हुए प्रार्थनापत्र प्रविष्ट किया है । इसमें उन्होंने कहा, “संविधानके अन्तर्गत उनके अधिकारोंका उल्लङ्घन हुआ है । ‘ट्विटर’ उनके खातेको बन्दकर ‘इस्लामी’ आतङ्कवादियोंका पक्ष ले रहा है । कभी-कभी यह ‘इस्लामी’ आतङ्कके शिकार लोगोंके विरुद्ध ‘ट्विटर’के अपने पूर्वाग्रह होते है ।” आरतीद्वारा १५ दिसम्बर २०२१ को अपने भाई साहिलको ‘मृत्युका भय’ दिखानेवाले ‘इस्लामी’ आतङ्कवादियोंका एक चित्रपट साझा करनेके पश्चात ‘ट्विटर’ने आरतीके खातेको निलम्बित कर दिया था । साहिल श्रीनगरका रहनेवाला है और भारतीय जनता युवा मोर्चाकी जम्मू-कश्मीर इकाईका प्रवक्ता भी हैं ।
आरतीने आरोप लगाया, “ट्विटर इण्डिया पाकिस्तान प्रायोजित आतङ्कवादियोंको भारतीयोंको भयभीत करने और कश्मीरी पण्डितोंके विरुद्ध षड्यन्त्रके सिद्धान्तोंको स्थापित करने हेतु ‘ट्विटर स्पेस’ सुविधाका उपयोग करनेकी अनुमति दे रहा है ।” आरतीके ‘ट्वीट’ने स्पष्ट रूपसे किसी समुदायके विरुद्ध घृणाको प्रोत्साहित नहीं किया है; अपितु वह मात्र अपने भाईके विरुद्ध इस प्रकारकी कार्यवाहीकी सूचना दे रही थी ।
इससे पूर्व भी ‘ट्विटर’की निष्पक्षतापर अनेक बार प्रश्न उठाया चुका है तथा इसके लिए उसे शासनद्वारा फटकार भी पड चुकी है । ऐसे संगठनोंमें कार्यरत अधिकारियोंकी विचारधारापर सन्देह प्रकट होता है । शासन अपने अभिकरणोंद्वारा ऐसे माध्यमोंकी जांच कराए तथा इनपर नियन्त्रण करे ! देश विरोधी गतिविधियोंके पाए जानेपर इन्हें प्रतिबन्धित करे । इसके साथ हिन्दू भी अब ऐसे ‘सोशल मीडिया’ माध्यमोंसे हटकर स्वदेशी माध्यमोंका उपयोग करें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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