स्वामी विवेकानंदके बंगालमें तथा आदि शंकराचार्यजीके केरलमें जन्महिन्दुओंने साम्यवादियोंको अनेक दशकोंसे चुना और आगेकी अनेक भावी पीढियोंपर साम्यवादका संस्कार अंकित किया; इसलिए वहांके जन्महिन्दुओंकी स्थिति अत्यन्त दयनीय हो गई है । इसमें कोई आश्चर्य नहीं ! हिन्दुओंको धर्मशिक्षा देकर उनसे साधना करवाकर उनका धर्माभिमान बढाना ही उसका एकमात्र उपाय है । ऐसा न करनेपर वहां के जन्महिन्दुओंका अस्तित्व ही आतंकवादियोंद्वारा नष्ट किया जाएगा । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले
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