आत्मज्ञानीके लिए सब कुछ साध्य है


आत्मज्ञानी व्यक्ति मात्र आध्यात्मिक प्रगति करवानेका सामर्थ्य नहीं रखते हैं अपितु वे लौकिक सुख-साधनोंको भी देनेका सामर्थ्य रखते हैं; अतः गृहस्थोंको अपने तीन तापोंसे (आधिभौतिक, आधिदैविक एवं आध्यात्मिक) मुक्ति हेतु ऐसे आत्मज्ञानीके शरणमें जाने हेतु बताया गया है । आत्मज्ञानियोंके लिए कुछ भी अप्राप्य नहीं, इस सम्बन्धमें मुण्डक उपनिषदमें कहा गया है –

यं यं लोकं मनसा संविभाति विशुद्धसत्व: कामयते यांश्च कामान् ।

तं तं लोकं जयते तांश्च कामांस्तस्मादात्मज्ञं ह्यर्चयेद् भूतिकाम: ।। – (मुण्डक उपनिषद् , तृतीय मुण्डक, प्रथम खण्ड, मंत्र -१०)

अर्थात निर्मल अन्त:करणवाला आत्मज्ञानी सन्त जिस-जिस लोकका मनसे चिन्तन करता है, जिन कामनाओंको करता है, उस-उस लोकको और उन कामनाओंको प्राप्त कर लेता है; अत: ऐश्वर्यादिकी इच्छा करनेवाला मनुष्य आत्मज्ञानीका अर्चन करे ।



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