‘राज्यकर्ता सात्त्विक हो, तो ही वह प्रजाको भी सात्त्विक बनाकर रामराज्य स्थापित कर सकता है । प्रजा सात्त्विक हो, तो ही वह सात्त्विक व्यक्तिको चुनेगी; किन्तु आजकल राजनीतिज्ञोंद्वारा धर्मशिक्षा न दिए जानेके कारण प्रजा सात्त्विक नहीं है; इस कारण प्रजा चुनकर दे रहे जात्यन्ध, भ्रष्ट, गुंडे और धर्मद्रोही मनोवृत्तिके जनप्रतिनिधियोंके कारण लोकतन्त्र निरर्थक ही नहीं, अपितु देशघातक, धर्मघातक बन चुका है ।
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