अप्रैल १७, २०१९
मुम्बईमें एक ‘उबर’ चालकने छत्रपति शिवाजी महाराजको लेकर अपशब्द कहे ! मराठा साम्राज्यके अधिपति रहे शिवाजीके नामपर सिनेमाघरको (थिएटरको) देखते ही चालक आफताब क्रोधित हो गया और उसने शिवाजीको मां-बहनके अपशब्द कहना आरम्भ कर दिया । उल्लेखनीय है कि मुम्बई स्थित ‘शिवाजी मंदिर’ थिएटर मुंबईके दादरमें स्थित है ।
आफताबने कहा,“जहां देखो वहां शिवाजी और ये लोग तो पूजा भी करते हैं उसकी !” ‘ट्विटर’पर उबर चालकके बारेमें ये जानकारी समीरने दी । समीरने जब चालकसे अपशब्द नहीं बोलने को कहा तो वो और भी क्रोधित हो गया ।
I told him to mind his language. He didn't
Then he started telling me Tum bhi pooja karte ho uski. Band karo. Aap bolo ki aise logonki pooja nahi karenge
I said its my wish. No one forcing u to worship him. Then his tone got more threatening. 2/n pic.twitter.com/mteeH0jnNs
— Guru Samy (@WellSaidGuru) April 16, 2019
आफताबका कहना था कि किसीको भी शिवाजीकी पूजा नहीं करनी चाहिए । उसने मध्य यात्रामें समीरको वाहनसे उतर जानेको भी कहा । उसने समीरसे कहा कि इतने यातायातके पश्चात भी वो उन्हें लेने आ गया यही बहुत है । जैसे-तैसे उसने समीरको उनके गन्तव्यतक तो छोड दिया; परन्तु उसने उनका चलभाष छीनकर स्वयंको ५ रेटिंग देनेका प्रयास किया, जब उन्होंने उबरसे इस बातकी परिवाद की तो उबरने रुपए वापसकर कहा कि उक्त चालकके विरुद्ध कार्यवाही की गई है ।
समीरने इस घटनाका विवरण देते हुए कहा कि वो ये सब इसीलिए बता रहे हैं ताकि किसी भविष्यमें अन्य यात्रीके साथ ऐसी घटना न हो । उनका मानना है कि अल्पसंख्यकोंको भी हिन्दू भावनाओं व परम्पराओंका सम्मान करते हुए इन सबके विरुद्ध अपशब्द नहीं कहने चाहिए । उन्होंने मीडियापर भी प्रश्न किया । उन्होंने कहा कि मीडिया दृष्टिकोण बनाता है कि हिन्दू भीड मुस्लिमोंको मार रही है । इसके पश्चात कई अन्य उपभोक्ताओंने भी अपनी बातें रखीं ।
“धर्मान्धोंका विचित्र है कि हत्यारे बाबर और अकबरके नामपर मस्जिदेंतक बना देते हैं और हिन्दुओंसे वे हिन्दू हृदय सम्राट, सबको प्रेम करनेवाले वीर योद्धा शिवाजी महाराजका सम्मान करनेसे भी चिढते हैं । यह कुण्ठा कहांसे आती है ? इसप्रकारकी कोई कुण्ठा संविधानमें तो नहीं बताई है, जिसकी धर्मान्ध दुहाई देते हैं (वन्दे मातरम आदिके प्रकरणमें) ! यह कुण्ठा तो मजहबी है, जो तथाकथित भाईचारेसे परेय शरियत और जिहादसे पनपी है । इससे स्पष्ट होता है कि भाईचारेका सन्देश केवल हिन्दुओंके मनमें भरा है, जिसकी हानि भी वही उठाता है । इन प्रकरणके पश्चात भी यदि किसीके नेत्र न खुलें तो मान लेना चाहिए कि विवेक और बुद्धि दोनों नष्ट हो चुके हैं और समीर जैसे लोग अभिनन्दनके पात्र है । ऐसे कृत्योंपर मौन ही हमारे समाजको हानि पहुंचाता है । इसीप्रकार सभीने सत्यको उजागर करना चाहिए ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
Leave a Reply