जनवरी ८, २०१९
केरलमें राज्यकी दूसरी सबसे ऊंची चोटी ‘अगस्त्याकूर्दम’की ओर जानेवाला दुर्गम मार्ग प्रथम बार महिलाओंके लिए खुलनेके लिए तैयार है । एक ओर जहां कुछ लोग शासनके इस निर्णयसे अप्रसन्न हैं, तो कुछ लोग इसे लेकर क्रोधित भी दिख रहे हैं । नय्यर वन्यजीव अभयारण्यके दुर्गम वनोंमें स्थित १८६८ मीटर ऊंची चोटीपर अब तक महिलाओंके चढनेपर प्रतिबन्ध था, जिसे कि राज्य शासनने गत दिवसोंमें हटानेका निर्णय किया था । ऐसेमें महिलाओंको अब इस पहाडीपर ट्रेकिंग करनेका अवसर मिल सकेगा ।
बता दें कि गिरिपीठमें रहनेवाली ‘कानी जनजाति’के अनुसार यह पर्वत उनके देवता ‘अगस्त्य मुनि’का निवास स्थान है, जो यहां रहनेवाले लोगोंके संरक्षक माने जाते हैं । अब तक महिलाओंको पारम्परिक रूपसे इस चोटीपर चढाई करनेकी अनुमति नहीं थी । इस चोटीपर ही अगस्त्य मुनिकी प्रतिमा स्थापित है । जनजातीय महिलाएं चिरकालसे इस प्रतिबन्धका पालन करती रही हैं और वे चोटीसे लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित आधार शिविर आथिरामालासे आगे नहीं जाती हैं । इसके अतिरिक्त यह उन हिन्दू श्रद्धालुओंके लिए प्रतिष्ठित तीर्थस्थल है, जो मानते हैं कि अगस्त्य मुनिने इस पर्वतकी चोटीपर ही ध्यान लगाया था ।
शासनके निर्णयपर आदिवासी महासभाके प्रदेश अध्यक्ष मोहनन त्रिवेणीने कहा है कि वह इससे अत्यधिक दुखी और हताश हैं; परन्तु हम क्या कर सकते हैं ? हम दुर्बल लोग हैं । हमारे पास उनके निर्णयके विरुद्ध लम्बे समय तक वैधानिक लडाई लडनेकी शक्ति नहीं है ।
अगस्त्यकूर्दम मंदिर कानीक्कर समितिके अध्यक्ष मोहननने कहा कि वन विभाग और ट्रेकर्सके लिए भले ही यह रोमांचक स्थल है; परन्तु हमारे लिए यह हमारा जीवन और आस्था है । उन्होंने कहा कि यह एक दुर्गम क्षेत्र है । ऐसेमें हमें भय है कि अत्यधिक लोगोंके आनेसे यहां प्लास्टिक कचरा और मद्यकी बोतलें एकत्रित हो जाएंगी, जबकि ये वस्तुएं वहां प्रतिबन्धित हैं । ऐसेमें इससे समूचा क्षेत्र नष्ट हो जाएगा ।
“प्रचण्ड विद्वान व महाज्ञानी अगस्त्यमुनि सप्तऋषियोंमेंसे एक हैं और वह पर्वतीय क्षेत्र उनकी तपोभूमि है, उसे अब महिलाओंके लिए एक ‘ट्रैकिंग’ स्थल बनाना हिन्दुओंके लिए लज्जाजनक व अपमानका विषय है ! आदिवासी महिलाएं प्रतिबन्धित नियमका वर्षोंसे पालन करती आई हैं, परन्तु आजकी तथाकथित आधुनिक महिलाएं, जिनमें धर्मका अंश मात्र भी ज्ञान नहीं, केवल हिन्दू धर्मपर आघात करने हेतु न्यायालय व निधर्मी शासनकर्ताओंका आश्रय लेती हैं । केरलके निधर्मी मुख्यमन्त्रीके कृत्योंसे सभी परिचित हैं, ऐसेमें एक-एक कर तीर्थोंकी पवित्रता भंगकर हिन्दू धर्मकी विडम्बना करनेवाले मुख्यमन्त्रीके विरुद्ध केन्द्र कडी कार्यवाही करें, ऐसी सभी हिन्दुवादियोंकी मांग है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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