हिन्दुओंमें आतङ्क उत्पन्न करना था उद्देश्य, देहली उपद्रवोंमें न्यायालयने १० जिहादियोंपर आरोप किए निर्धारित


१७ दिसम्बर, २०२१
        देहलीके एक न्यायालयने २०२० में पूर्वोत्तर देहलीमें हुए हिन्दू विरोधी उपद्रवोंके प्रकरणमें १० के विरुद्ध आरोप निर्धारित  किए हैं । सुनवाईके मध्य न्यायालयने माना कि इनका मुख्य उद्देश्य हिन्दू समुदायके मनमें भय और आतङ्क उत्पन्न करना था । हिन्दुओंको देश छोडनेकी धमकी देना और उनकी सम्पत्तियोंको लूटना तथा जलाना था ।
        ‘लाइव लॉ’के प्रतिवेदनके अनुसार, आरोपितोंका अभिज्ञान (पहचान) मोहम्मद शाहनवाज, मोहम्मद शोएब, शाहरुख, राशिद, आजाद, अशरफ अली, परवेज, मोहम्मद फैजल, राशिद अर्थात मोनू और मोहम्मद ताहिरके रूपमें किया गया है । इनके विरुद्ध भारतीय दण्ड संहिताकी धारा-१४७, १४८, ४३६, ४५२, ४५४, ३९२, ४२७ और १४९ के अन्तर्गत आरोप निर्धारित किए गए हैं ।
        लगभग २ वर्ष पश्चात न्यायालयद्वारा देहली उपद्रवोंमें विलम्बसे निष्कर्ष देना, न्यायिक प्रक्रियाकी असंख्य विसङ्गतियों व अकार्यक्षमताको परिलक्षित करता है, विलम्बित न्याय प्रक्रियामें जिहादियों व अपराधियोंका मनोबल सातवें आकाशतक पहुंचना स्वाभाविक है; अतः स्वस्थ समाज व राष्ट्रकी आन्तरिक व बाह्य सुरक्षाके लिए न्यायिक व्यावस्थाका उत्तम विवेक होना आवश्यक है; इसलिए सभीको योग्य साधना व कालानुसार हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाको प्राथमिकता देते हुए कृतिशील होना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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