‘बुर्का’ विवादके पक्षमें आए ओवैसी कहा, “नोबेल पुरस्कारवालोंको भी ‘हिजाब’से समस्या नहीं”
१० फरवरी, २०२२
कर्नाटकके ‘बुर्का’ विवादका प्रभाव अब राजनीतिपर भी दृष्टिगत होने लगा है । ‘हिजाब’के विवादपर ‘ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन’के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसीने कहा है कि ‘हिजाब’ पहनकर महिलाएं ‘फुटबॉल वर्ल्ड कप’ खेल सकती हैं, ‘इंटरनेशनल बास्केटबाल टूर्नामेंट’में सहभागी हो सकती है; परन्तु आप यहां क्या कर रहे हैं ? उन्होंने केन्द्र शासनपर आरोप लगाते हुए कहा, “क्या ‘बेटी बचाओ बेटी पढाओ’के घोषपर देशको कहां लेकर जा रहे हैं ?” ‘हिजाब’ प्रकरणपर किसी भी राजनीतिक दलद्वारा वक्तव्य न दिए जानेपर ओवैसीने आजतकसे कहा कि इस प्रकरणको लेकर सभी राजनीतिक दलोंको बोलना चाहिए । किससे भयभीत हो रहेहैं ? यदि नहीं बोले तो १० मार्चको परिणाम भुगतना पडेगा । औवेसीने यह भी कहा कि ‘बीजेपी’की जनयात्रामें मुसलमान महिलाएं ‘हिजाब’ पहनकर जाती है एवं नड्डाजीकी आरती उतारती हैं; परन्तु वहां उन्हें कोई आपत्ति नही है, तब सब अच्छा है । ओवैसीने यह भी कहा कि यमनकी एक लडकीको ‘नोबेल प्राइज’ मिला, वह भी हिजाबमें है । अर्थात ‘नोबेल प्राइज’ देने वालोंको भी कोई आपत्ति नहीं । वहीं उन्होंने प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी व योगी शासनपर प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने ५ वर्षोंमें ‘मदरसों’को एक पैसा भी नहीं दिया है । देवबंद एक ‘स्कूल ऑफ थॉट’ है । यहांके जितने भी ‘स्कॉलर’ है, वह भारतकी भूमिसे प्रेम करते हैं । इनका तालिबान व अफगानिस्तानसे सम्बन्ध बताना अयोग्य है ।
ओवैसी भी ‘हिजाब’पर केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं । ‘हिजाब’से हिन्दुओंको भी कोई समस्या नहीं है । समस्या केवल ‘हिजाब’को माध्यम बनाकर, जिहाद और अराजकता फैलानेसे है । जो महिलाएं ‘हिजाब’ पहनकर विद्यालय जाना चाहती हैं, ओवैसी उन्हें कहें कि ‘हिजाब’ पहनकर मस्जिद जाकर दिखाएं, यह अधिक आवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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