बिहार विधानसभामें ‘एआईएमआईएम’के नेता अख्तरुल इमानने राष्ट्रगीत गानेसे किया मना, पूछा, “क्या कोई संवैधानिक अनिवार्यता है ?”
४ दिसम्बर, २०२१
बिहार विधानसभाके शीत कालीन सत्रमें ‘स्पीकर’ विजय कुमार सिन्हाने सत्रके प्रथम दिन राष्ट्रगान (जन-गण-मन) व अन्तिम दिन राष्ट्रगीत (वन्दे मातरम) गानेकी परम्परा प्रारम्भ की ।
इसपर अख्तरुल इमानने आपत्ति दर्शाई । उन्होंने पूछा कि कहां लिखा है कि राष्ट्रगीत गाना अनिवार्य है ? क्या यह संवैधानिक दबाव है ? वे बोले कि न वे वन्देमातरम गाते हैं, न गाएंगे ।
उनकी टिप्पणीके बाद ‘भाजपा’ विधायक हरि भूषण ठाकुरने इसे देशद्रोही कार्य बताते हुए कहा कि उनके विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए । उन्होंने कहा कि भारतका अन्न व जल ग्रहणकर ये लोग भारतके विभाजनकी जिहादी मानसिकता रखते हैं । ‘बीजेपी’ नेता संजय सिंहने कहा कि ऐसे लोगोंको देशमें रहनेकी आवश्यकता नहीं है ।
उल्लेखनीय है कि अख्तरुल इमान पूर्वमें भी अपने व्यक्तव्योंके कारण चर्चामें आए थे । उन्होंने जनसङ्ख्या वृद्धिके विरोधमें वक्तव्य दिया था । उन्होंने कहा था कि कुछ विशिष्ठ विचारधारावाले लोग देशका वातावरण दूषित करना चाहते हैं । उनकी दृष्टिमें जनसङ्ख्या नियन्त्रण आवश्यक नहीं है ।
अख्तरुल इमानसे पूछा जाना चाहिए कि संवैधानिक बाध्यता तो उनके और उनके राष्ट्रविरोधी जिहादी समूहके भारत जैसे पवित्र देशमें रहनेकी भी नहीं है, तो वे कब देशसे पलायन करेंगे ? – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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