अखरोट (भाग-१)
अखरोट (अक्षोट) एक प्रकारका सूखा मेवा है, जो अधिकतर शीत ऋतुमें खानेके लिये उपयोगमें लाया जाता है । अखरोटका बाह्य आवरण कठोर होता है और उसके अन्दर मानवके मस्तिष्क जैसे आकारवाली गिरी होती है । पहले यह फल हरे रङ्गका होता है; किन्तु पूर्ण रूपसे पकनेके पश्चात भूरे रङ्गका दिखाई देता है, तदुपरान्त छिलका हटानेसे अखरोटकी गिरी दिखाई देती है जो हल्के भूरे रङ्गके बीज होते हैं और एक दूसरेमें संलग्न होते हैं । आंग्ल भाषामें इसे ‘वालनट’ और वनस्पति भाषामें इसे ‘Juglans Regia’ कहते हैं ।
ये पतझड करनेवाले अत्यन्त सुन्दर और सुगन्धित वृक्ष होते हैं । इसकी दो जातियां पाई जाती हैं । ‘जंगली अखरोट’ १०० से २०० फुटतक ऊंचे अपने आप उगते हैं । इसके फलका छिलका मोटा होता है । ‘कृषिजन्य अखरोट’ ४० से ९० फुटतक ऊंचा होता है और इसके फलोंका छिलका पतला होता है । इसे ‘कागजी’ अखरोट कहते हैं । अखरोट कई गुणोंका धनी है ।
एक अखरोटके फलमें एक ही बीज होता है, जो कि स्वादिष्ट और कुरकुरा होता है I इसमें कई प्रकारके पोषक तत्त्व होते हैं, जो शरीरके लिए अति आवश्यक होते हैं ।
घटक : बिना छिलकेके अखरोटमें ४% पानी, १५% ‘प्रोटीन’, ६५% ‘वसा’ और १४% ‘कार्बोहाइड्रेट’ और ७% ‘फाइबर’ और शर्करा लगभग ३ ग्राम पाया जाता है । अखरोटमें कई खनिजोंकी समृद्धता होती है; विशेषतया ‘मैंगनीज’ और विटामिन ‘बी’ भी प्रचुर मात्रामें पाए जाते हैं । अधिकतर कडे खोलवाले फलोंमें ‘मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड’ पाया जाता है I
अखरोटके तेलमें मुख्यतः ‘पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड’ (कुल वसाका ७२%), विशेष रूपसे ‘अल्फा-लिनोलेनिक एसिड’ (१४%) और ‘लिनोलिक एसिड’ (५८%) पाया जाता है, जबकि इसमें ‘ओलिक एसिड’ भी कुल वसाका १३% तक पाया जाता है । विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘बी’, विटामिन ‘सी’, विटामिन ‘बी-१२’, विटामिन ‘डी’ भी पाए जाते हैं, इसीलिए इसको विटामिनोंका राजा भी कहा जाता है और अखरोटमें ‘कैल्शियम’, ‘मैग्नीशियम’, ‘आयरन’, ‘फॉस्फोरस’, ताम्बा और ‘सेलेनियम’ प्रचुर मात्रामें पाए जाते हैं ।
आइए, अब हम अखरोटके स्वास्थ्य लाभके विषयमें जानते हैं :
हृदयके लिए लाभदायक : इसमें ‘पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड’ होता है, जो हृदय प्रणालीके लिए लाभदायक होता है । ‘पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड’ शरीरसे बिगडे पित्तसान्द्रवको (कोलेस्ट्रॉलको) न्यून करके अच्छे ‘कोलेस्ट्रॉल’के निर्माणमें सहायता करता है, जिससे हृदयको स्वस्थ रखनेमें सहायता मिलती है । प्रतिदिन दो अखरोट खानेसे हृदयका सञ्चार ठीक रहता है । भिगोकर रखे हुए अखरोटकी गिरियां सवेरे अल्पाहारसे पहले खानेसे हृदयकी शिथिलता न्यून होती है ।
मस्तिष्कके लिए : अखरोटमें प्रचुर मात्रामें ‘ओमेगा-३ फैटी एसिड’ पाया जाता है, जो मस्तिष्ककी कार्यप्रणालीका सन्तुलन बनाए रखता है । मस्तिष्क अधिक थक जानेपर, दो अखरोट हलके उष्ण दूधके साथ लेनेसे नूतन ऊर्जा मिलती है । अखरोटकी गिरीको नित्य २५ से ५० ग्रामतक खानेसे मस्तिष्कको शीघ्र सबलता प्राप्त होती है ।
आंखोंके लिए : आयुर्वेदमें आंखोंके लिए, अखरोटसे विशेष प्रकारसे औषधि बनाकर प्रयोग करनेसे अत्यन्त लाभ होता है । दो अखरोट और चार हरडकी गुठलियोंको जलाकर, उनकी भस्मको और चार दाने काली मिर्चको, एक साथ पीसकर अञ्जन करनेसे (आंखोंमें लगानेसे) नेत्रोंकी ज्योति बढ जाती है ।
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