महिलाओंमें अंतःस्राव (हॉर्मोन) सन्तुलनमें लाभप्रद – इसमें पाए जाने वाले फाइटोएस्ट्रोजनके कारण यह महिलाओंके लिए लाभकारी है । महिलाओंमें रजोनिवृत्तिके समय होनेवाले अंतःस्राव परिवर्तन और उसके कारण होनेवाली समस्याएं जैसे अत्यधिक गर्मी (Hot Flashes), व्यकुलता, अनियमित रक्तस्त्राव (dysfunctional uterine bleeding), कमरमें वेदना, योनिका शुष्क होना और जोडोंकी वेदनामें यह बहुत अधिक लाभप्रद है ।
मधुमेहको (डायबिटीजको) रखता है नियन्त्रित – अलसीका सेवन मधुमेहके स्तरको नियन्त्रित रखता है । अमेरिकामें मधुमेहसे ग्रस्त लोगोंपर अनुसंधानसे यह सामने आया है कि अलसीमें विद्यमान लिगननको लेनेसे मधुमेहका स्तर नियन्त्रणमें रहता है । मधुमेहके रोगीको २५ ग्राम अलसी खानी चाहिए । उन्हें पीसी अलसीको आटेमें मिलाकर रोटी बनाकर खाना चाहिए ।
कफ पिघलानेमें लाभप्रद – अलसीके बीजोंका मिश्रण यन्त्रमें(मिक्सी) तैयार कर, चूर्ण १५ ग्राम, मुलेठी ५ ग्राम, मिश्री २० ग्राम, आधे नींबूके रसको उबलते हुए ३०० ग्राम जलमें डालकर बर्तनको ढक दें । इस रसको तीन घण्टे पश्चात छानकर पिएं । इससे गले व श्वास नलीमें जमा कफ पिघल कर बाहर निकल जाएगा ।
गठिया रोगमें – इन बीजोंमें पाए जानेवाला अल्फा-लिनोलेनिक अम्लसे(एसिड) जोडोकी बीमारी गठियाके(अर्थराइटिस) लिए और सभी प्रकारके जोडोंकी वेदनामें लाभ मिलता है।
गर्भवती स्त्रियोंके लिए – गर्भवती स्त्रियों और स्तनपान करानेवाली माताओंको इसका सेवन अवश्य करना चाहिए । आज भी छोटे नगरों और कस्बोंके कई कुटुम्बमें ऐसी स्त्रियोंको अलसीके बने लड्डू और अन्य भोज्य पदार्थ दिए जाते हैं । यह इस बातका प्रमाण है कि हमारे पूर्वज अलसीका महत्व भली प्रकारसे जानते थे ।
सेवन विधि – हमें प्रतिदिन ३०-६० ग्राम अलसीका सेवन करना चाहिए । ३० ग्राम आदर्श मात्रा है । अलसीको प्रतिदिन पीसकर आटेमें मिलाकर रोटी, पराठा आदि बनाकर खाया जा सकता है । यदि इसको कूट कर रखे तो इसको सात दिनके अन्दर सेवन कर ले अन्यथा इसके गुण खत्म हो जाते हैं अथवा इसके बीजोंको भून कर रख ले और कभी भी खा सकते हैं । अलसीको सूखी कढाईमें डालिए, भूनिए और मिश्रण यन्त्रसे(मिक्सी) पीस लीजिए, ध्यान रहे कि एकदम बारीक मत कीजिए और भोजनके पश्चात सौंफके समान इसे खाया जा सकता है ।
सावधानियां – अगर आप पहलेसे पित्त-सांद्रव (कोलेस्ट्रॉल) को न्यून करनेवाली, मधुमेह नियन्त्रण करने वाली अथवा रक्तको पतला करनेवाली औषधी ले रहे हैं तो अलसीका प्रयोग करनेसे पहले अपने चिकित्सकसे परामर्श अवश्य करें । इसकी उचित मात्राका सेवन करें। इसकी अधिकता भी हानि कर सकती है ।
यदिआपको अर्श रोगकी समस्या है तो इसका प्रयोग न करें।
इसके सेवनके पश्चात अधिकसे अधिक जल पिएं।
अलसीमें अधिक मात्रामें फाइबर पाए जाते हैं, जो जलकी न्यूनता होनेपर उदरमें वायु विकार जैसी समस्याओंको जन्म देते हैं ।
अलसीका अधिक मात्रामें सेवन प्रत्यूर्जता प्रतिक्रियाका (एलेर्जिक रिऐक्शन) कारण भी बन सकता है । इसके कारण उदरमें वेदना(पेट दर्द), उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती है इसलिए इसे सीमित मात्रामें ही खाएं ।
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