‘कृष्ण भक्त बलात्कारी, अकबरसे थे महाराणा प्रतापकी पत्नीके सम्बन्ध’: हिन्दू घृणासे ‘सने’ प्राध्यापकको (प्रोफेसरको) उच्च न्यायालयने नहीं दी ‘राहत’, काशी विश्वनाथपर भी की थी अनर्गल बात


२१ मई, २०२२
      लखनऊ विश्वविद्यालयके ‘हिन्दूफोबिक’ प्राध्यापक रविकांत चंदनको ‘राहत’ देनेसे इलाहाबाद उच्च न्यायालयने मना कर दिया है । न्यायालयने उसके विरुद्ध प्रविष्ट प्राथमिकीको निरस्त करनेकी याचना ठुकरा दी है । यद्यपि उसको बन्दी बनानेसे पूर्व सभी ‘कानूनी’ औपचारिकताओंका पालन करनेका निर्देश ‘पुलिस’को दिया गया है । उच्च न्यायालयका यह आदेश शुक्रवारको (२० मई २०२२ को) आया । रविकांत चंदनने काशी विश्वनाथ और हिन्दू साधु-सन्तोंको लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी ।
     लखनऊ विश्वविद्यालयके छात्रोंने ‘प्रोफेसर’ रविकांत चंदनकी टिप्पणीपर अप्रसन्नता व्यक्त की है । लखनऊ विश्वविद्यालयके छात्र अंकित तिवारीद्वारा ‘ट्विटर’पर १९ मई २०२२ को कुलपतिको दिए गए परिवादकी प्रति (कॉपी) साझा की गई है । इस परिवादमें ‘प्रोफेसर’ रविकांत चंदनके वक्तव्योंके कुछ अंश बताए गए हैं । इस परिवारके अनुसार ‘प्रोफेसर’ रविकांतने कहा, “महाराणा प्रतापकी पत्नीके अकबरसे अवैध सम्बन्ध थे । वे रात्रिमें शयन हेतु अकबरके पास जाया करती थीं । कृष्णके अनुयायी ‘बलात्कारी’ हैं । सीता रावणके घर अपनी इच्छासे रुकी थीं ।” ‘प्रोफेसर’पर ‘सोशल मीडिया’के माध्यमसे अराजक तत्त्वोंको विश्वविद्यालय परिसरमें बुलानेका भी आरोप है ।
      रविकांत चंदनके विरुद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषदने (ABVP ने) लखनऊके हसनगंज ‘थाने’में प्राथमिकी प्रविष्ट करवाई थी । प्राथमिकीमें हिन्दू भावनाओंको ‘ठेस’ पहुंचानेका आरोप लगाया गया है ।
      रविकांत चंदन जैसे लोग भारतकी संस्कृति और सभ्यताको कलङ्कित करनेमें लगे है । इनका उचित स्थान कारागृह ही है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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