विवाहका आश्वासन देकर किया दुष्कर्म, गर्भपात एवं इस्लाम स्वीकारनेका बनाया दबाव, उच्च न्यायालयने नहीं दी प्रतिभूतिकी सहमति
१० जनवरी, २०२२
‘फेसबुक’के माध्यमसे पीडिता आरोपी फरहान अहमदके सम्पर्कमें आई । उसने पीडिताको विवाहका आश्वासन देकर दुष्कर्म किया । वह गर्भवती हुई तो गर्भपातको विवश किया । उसने कहा कि धर्मान्तरणके बिना वह उससे विवाह नहीं करेगा । उसे हत्याकी धमकी भी दी ।
पीडिताने फरहानके विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट किया तो उसके विरुद्ध धारा ३७६, ५०४, ५०६, तथा उत्तरप्रदेशमें धर्मान्तरण निषेध अधिनियम २०२० की धारा ३/५ (१) के अन्तर्गत परिवाद प्रविष्ट किया गया ।
आरोपीके अधिवक्ता इसे असत्य आरोप बता रहे हैं । उनके अनुसार गर्भपातका कोई प्रमाण नहीं है; परन्तु इलाहाबाद उच्च न्यायालयने इस अपराधको गम्भीर मानते हुए, आरोपीको प्रतिभूति देनेपर असहमति दर्शाई है ।
न्यायालयका निर्णय योग्य है । जानबूझकर या अनजानेमें भी जिहादियोंसे सम्पर्क, दुःखका कारण बनता है, यह हिन्दुओंको समझ लेना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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