अन्नपूर्णा स्तुति


अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरः प्राणवल्लभे ।
ज्ञान वैराग्य सिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वती ।।
 अर्थ : हे अन्नपूर्णा, शंकरकी प्राणप्रिया , हे पार्वती, हमें ज्ञान और वैराग्यकी प्राप्तिकी भिक्षा दें !


One response to “अन्नपूर्णा स्तुति”

  1. Omkar bhat says:

    अत्योपयोगी स्तुती ||

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