भारतमाता और भूमाताके विरोधमें अपमानजनक विधान करनेवाले ‘पादरी’पर लगी अपराधरहित करनेकी आवेदनको मद्रास उच्च न्यायालयने किया निरस्त
०९ जनवरी, २०२२
‘भारतमाता’ और ‘भूमाता’के विरोधमें अपमानजनक विधान करनेवाले ‘पादरी’ जॉर्ज पोन्नैयापर प्रविष्ट किया गया अपराध रहित करनेसे मद्रास उच्च न्यायालयने मना कर दिया । पोन्नैयापर धारा २९५ (अ) के (धार्मिक भावना दुखानेके) अन्तर्गत अपराध प्रविष्ट किया गया है । १८ जुलाई २०२१ के दिन उन्होंने कन्याकुमारीमें एक कार्यक्रमके अपमानजनक विधान किए थे ।
न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथनने सुनवाईके समय कहा, “भूमाताका सम्मान करनेके लिए ‘चप्पल’ न पहनते हुए चलनेवालोंका पोन्नैयाने उपहास किया है । पोन्नैयाने भूमाता और भारतमाताका ‘महामारी और अस्वच्छताका स्रोत’, कहकर उल्लेख किया है । हिन्दुओंकी धार्मिक भावनाएं दुखानेके लिए इससे अधिक अपमानजनक कुछ हो नहीं सकता । भारतमातासे हिन्दुओंकी भावनाएं जुडी है । भारतमाता अनेक हिन्दुओंके लिए देवी समान हैं । किसीको भी किसीकी धार्मिक भावनाएं दुखानेका अधिकार नहीं । पोन्नैयाका लक्ष्य हिन्दू थे । वे हिन्दुओंको भिन्न, तो मुसलमान और ईसाइयोंको भिन्न दृष्टिसे देखते हैं ।”
पोन्नैयाने नागरकोलीके ‘भाजपा’ विधायक एमआरगांधीपर टिप्पणी करते हुए कहा, “भारतमाताको कष्ट देनेकी इच्छा न होनेके कारण गांधी ‘चप्पल’ नहीं पहनते थे । ‘हमारे पांव अस्वच्छ न हों और भारतमाताके कारण हमें कोई भी रोग न हो, इसके लिए हम (ईसाई) ‘चप्पल’ पहनते हैं ।
यह निर्णय स्वागतयोग्य है । अन्य न्यायाधीशोंको इस निर्णयसे प्रेरणा लेनी चाहिए । हिन्दुओ, अब न्यायालय भी हमारी शक्तिका अभिज्ञान करने लगा है; अतः राष्ट्रहित हेतु सदैव प्रयासरत रहें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
साभार : सनातन प्रभात
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