दुबईसे आया असमका मोहम्मद तारिक, देहली विमानतलपर तिरंगेपर खडे होकर पढी ‘नमाज’ : ’सीआईएसएफ’ने देहली ‘पुलिस’को सौंपा


२१ मई, २०२२
      देहलीके इंदिरा गांधी अन्तरराष्ट्रीय विमानतलपर राष्ट्रीय ध्वजके अपमानका एक प्रकरण सामने आया है । मोहम्मद तारिक अजीज नामक एक व्यक्तिको तिरंगेपर खडे होकर ‘नमाज’ पढनेके आरोपमें अभिरक्षामें लेनेके उपरान्त ’सीआईएसएफ’ने देहली ‘पुलिस’को सौंप दिया था । घटना आठ मई २०२२ की है; किन्तु प्रकरण अब प्रकाशमें आया है ।
      ‘मीडिया’ प्रतिवेदनके अनुसार, आरोपित तारिक अजीज दुबईसे देहली आया था । यहांसे उसे दीमापुरके लिए ‘इंडिगो एयरलाइंस’की उडानपर सवार होना था । इस मध्य वह देहली विमानतलपर ही राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भूमिपर फैलाकर उसपर खडा हो गया । तिरंगेपर ही उसने ‘नमाज’ पढनी आरम्भ कर दी । यह सबकुछ विमानतलके ‘बोर्डिंग’ द्वार क्रमाङ्क १  और ३ के मध्य हो रहा था ।
      विमानतलकी सुरक्षामें नियुक्त केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बलको तारिक अजीजकी क्रियाकलाप सन्दिग्ध लगा । उन्होंने तारिकको पकडकर देहली ‘पुलिस’की अभिरक्षामें दे दिया । पूछताछमें आरोपित प्रश्नोंका सन्तोषजनक उत्तर नहीं दे पा रहा था । इसके उपरान्त ‘पुलिस’ने तारिकपर राष्ट्रीय सम्मानके अपमानकी रोकथाम अधिनियम, १९७१ के अन्तर्गत  अभियोग प्रविष्ट किया ।
      ‘पुलिस’के खोज अभियानमें तारिक अजीजसे उसका ‘पासपोर्ट, बोर्डिंग पास’की प्रतिलिप और राष्ट्रध्वज प्राप्त हुआ । ‘पुलिस’ने इसे अपने अधिकारमें ले लिया । ‘डीसीपी मेट्रो’ जितेंद्र मणिके अनुसार, अजीजको भारतीय दण्ड सहिंता की धारा ४१ के अन्तर्गत सूचनापत्र दिया गया है, जिसके उपरान्त उसे छोड दिया गया । यह सूचनापत्र तब दिया जाता है जब किसी आरोपितको बन्दी बनानेकी आवश्यकता नहीं होती । सूचनापत्रमें ‘पुलिस’ अधिकारीके सामने उपस्थित होनेका आदेश दिया जाता है, जिसे न माननेपर आरोपितकी बन्दी बनानेका प्रावधान होगा है ।
     जिहादी कहीं भी उनकी क्रियाकलाप देशद्रोही ही होते हैं । ऐसे जिहादियोंको कठोर दण्ड मिले इसके हम सभीको प्रयास करने चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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