आतंकवादका कैसे सामना कर उसे जडसे नष्ट करना चाहिए यह कोई अहिंसाके पुजारी कहे जानेवाले बौद्ध देश श्रीलंकासे सीखे ! वहां तो ऐसी स्थिति बौद्धोंने निर्माण कर दी है कि वहांके मुसलमान मन्त्रीगण त्यागपत्र देने हेतु बाध्य हो गए हैं ? हमारे यहां तो सत्ता मिलते ही देशहित गौण और स्वहित प्रधान हो जाता है फलस्वरूप सभी राजनेता चाहे वे किसी भी दलके हों, अहिंदुओंका तुष्टिकरण आरम्भ कर देते हैं तभी तो सात दशकोंसे यह देश आतंकवाद, नक्सलवाद, साम्प्रदायिक उत्पात(दंगे), राजनीतिक हत्यासे आज तक निकल नहीं पाया है | इस हेतु अब मात्र हिन्दू राष्ट्र ही एकमात्र विकल्प है !
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