‘एटीएस’ने धर्मान्ध मानव तस्करको बनाया बन्दी, रोहिंग्या-बांग्लादेशियोंकी कराता था प्रतिभूति


२८ फरवरी, २०२२
             उत्तर प्रदेश ‘एटीएस’ने बांग्लादेशी-रोहिंग्योंको छ्द्म प्रमाणपत्रोंसे भारतीय नागरिकता प्राप्त करवाने तथा मानव तस्करी ‘रैकेट’में सक्रिय सदस्यकी भूमिका निभाने वाले मोहम्मद रफीकको (रफीक उल इस्लामको), लखनऊ ‘रेलवे स्टेशन’से बन्दी बनाया है । समाचारके अनुसार रफीक म्यांमारका नागरिक है; परन्तु अवैध रूपसे सीमापारकर वह बंगालके नादिया जनपदमें रह रहा था । उसने झूठे प्रमाणपत्रोंकी सहायतासे भारतकी नागरिकता भी प्राप्त कर ली थी । इसके पश्चात वह हैदराबादकी एक मांस ‘फैक्ट्री’में कार्यरत था तथा उत्तर प्रदेश व अन्य राज्योंके कारागृहमें बन्द रोहिंग्या नागरिकोंको प्रतिभूति दिलानेमें सहायता करता था । वह कारागृहमें बन्द नागरिकोंके परिजनसे धन लेकर यह कार्य करता था । प्रत्येक प्रतिभूतिके वह १५ से २० सहस्र रूपए लेता था । उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेशकी एटीएस’ने गत दिनों इस्माइलको बन्दी बनाया था । रफीक उसीका मित्र है एवं २५ फरवरीको लखनऊके उस न्यायालयमें उपस्थितिके मध्य वह उससे मिलनेवाला था; परन्तु इससे पूर्व ही उसे बन्दी बना लिया गया ।
        छद्म प्रमाणपत्रकी सहायतासे अनेक विदेशी नागरिक भारतकी नागरिकता प्राप्त कर चुके हैं । यह षडयन्त्र बृहद स्तरपर चल रहा है । इसकी रोकथाम हेतु राष्ट्रीय नागरिकता पंजीयन (एनआरसी) विधान शीघ्र लाया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


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