
धर्मशिक्षणके अभावमें आजकल अनेक माता-पिता अपने बच्चोंका पालन पोषण योग्य प्रकारसे नहीं कर पाते और परिणामस्वरूप उनके बच्चोंको अल्प आयुसे ही अनेक प्रकारके शारीरिक और मानसिक कष्ट होने आरंभ हो जाते हैं | मैंने आजकलके माता -पिताकी पालन-पोषणमें निम्नलिखित त्रुटियां देखी हैं –
बच्चोंको अल्प आयुसे ही कोल्ड ड्रिंक्स और बाहरके बने पदार्थ जैसे चिप्स, कुरकुरे जिसमें संरक्षक तत्त्व (preservatives) रहते हैं उसे ग्रहण करनेको देने लगते हैं | जिस पदार्थमें ऐसे तत्त्व हों वे तो तमोगुणी होते ही है उससे बच्चोंमें तमोगुणका प्रमाण बढता है, यह सामान्य सी बात आजके माता-पिताको समझमें नहीं आती है | अन्नका मनपर अत्यधिक संस्कार पडता है अतः अपने बच्चोंको बाहरके बने पदार्थ ग्रहण करनेके लिए नहीं देना चाहिए यह अनेक पालकको ज्ञात नहीं है | कई बार माताएं आलस्यवश घरमें कुछ भोजन या जलपान बनाकर नहीं देती और दस रुपए हाथमें थमा देती हैं और बच्चे बाहरके खाद्य पदार्थ लेकर ग्रहण कर लेता है | आजकल अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियोंके बने भोज्य पदार्थोंमें सूअरकी चर्बी, गायकी मांस इत्यादि मिलना सामान्य सी बात है | आजके तथाकथित पढे लिखे माता –पिता अपने बच्चको लाड करनेके क्रममें उन्हें अनजानेमें विष समान बाह्य पदार्थ खानेको देते हैं | पावरोटी ( ब्रेड ), मेगी, फ़्रोजेन फूड, पिज्जा, बर्गर जैसे तमोगुणी आहार देकर अपने बच्चोंका तमोगुण बढा देते हैं | माता-पिताका कर्तव्य होता है कि बच्चोमें सत्त्व गुणकी वृद्धि करें जिससे उसके जीवनमें ईश्वरीय कृपा और सुख समृद्धि बनी रहे; परंतु तमोगुणकी वृद्धि होनेसे उनके बच्चे इस सबसे दूर हो जाएंगे, यह आध्यात्मिक दृष्टिकोण भी पालकोंको ज्ञात नहीं है | कुछ माताएं दोसे चार वर्षके बच्चोंको फिल्मी गाने सुनाकर भोजन कराती हैं और यह बात वे बडे गर्वसे सबसे कहती हैं कि मेरा चार वर्षका बालक फलाने फिल्मी नायिकाके गानेमें रुचि लेता है, आजके फिल्मी गीत देखकर तो वैश्या भी लज्जित हो जाये, ऐसे संस्कार बालमनपर डालनेसे छोटी आयुमें ही बच्चेकी वासना जागृत हो जाती है और तमोगुणी कार्यक्रम देखकर भोजन करवानेके कारण बच्चोंको खिलाये जानेवाला भोजन विष बन जाता है |-तनुजा ठाकुर
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